कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में तबलीगी जमात को विलेन बताया जा रहा है, भारत में ही नहीं पाकिस्तान में भी। जिस तरह दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में हजारों तबलीगी जुटे और फिर घातक वायरस लेकर देश के कई कोनों में फैल गए, उसी तरह पाकिस्तान के रावलपिंडी में भी उन्होंने चेतावनियों को दरकिनार करके सालाना सम्मेलन किया और कोरोना संक्रमण बढ़ाने के जिम्मेदार बने। पाकिस्तान में भी तबलीगी जमात को गैर-जिम्मेदाराना रवैये के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।

पाकिस्तान के अखबार डॉन की एक रिपोर्ट में पंजाब स्पेशल ब्रान्च के हवाले से कहा गया है कि 10 मार्च को तबलीगी जमात के सम्मेलन में 70 से 80 हजार लोग जुटे थे। हालांकि, जमात प्रबंधन ने दावा किया है कि 2.50 लाख से अधिक लोग इसमें शामिल हुए थे। इसमें 40 देशों के 3 हजार विदेशी नागरिक भी थे। पाकिस्तान में अब तक 4196 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं और 60 की मौत हो चुकी है।

डाउन की रिपोर्ट के मुताबिक, रावलपिंडी के करीब 2 लाख निवासी लॉकडाउन में हैं। जमात में शामिल करीब 10,263 लोगों को पंजाब के 36 जिलों में क्वारंटाइन किया गया है, जबकि हजारों की तलाश चल रही है। अब तक तबलीगी जमात के 539 लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। रावलपिंडी मरकज से 404 लोग संक्रमित मिले हैं।

जमात ने निर्देशों का लगातार उल्लंघन किया। इसके बाद प्रशासन ने जमात के बड़े पदाधिकारियों से बात की। इसके बाद 6 दिन के इवेंट को 3 दिन में खत्म किया गया। सम्मेलन खत्म होने के बाद हजारों लोग अपने घरों को चले गए, लेकिन 3 हजार विदेश सहित करीब 5 हजार लोग वहीं रह गए।

पंजाब के स्वास्थ्य संगठनों ने भी तबलीगी जमात की निंदा करते हुए कहा है कि जमात सदस्यों की लापरवाही की वजह से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं। मरकज से लौटने के बाद ये लोग अपने इलाकों में लोगों को शिक्षा देने निकल गए।

भारत में 5 हजार से अधिक मिले कोरोना वायरस संक्रमितों में 15 सौ से अधिक तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं, जबकि 25 हजार से अधिक तबलीगी जमात कार्यकर्ताओं और उनके संपर्क में आए लोगों को अलग-अलग राज्यों में क्वारंटाइन किया गया है। दिल्ली, यूपी और तमिलनाडु जैसे राज्यों में अधिकतर केस तबलीगी जमात से ही जुड़े हुए हैं।

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