माध्यमिक शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि निजी स्कूल अगले तीन महीनों की फीस एडवांस में ही जमा कराने के लिए अभिभावकों पर दबाव न डालें। कोरोना संक्रमण की इसक आपदा अवधि में लोगों को राहत देते हुए तीन महीने के बजाय मासिक शुल्क ही लिया जाए।

प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला ने जारी आदेश में कहा है कि यदि अभिभावक इसे भी दे पाने में असमर्थ हैं तो स्कूल प्रबंधन इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे। इसे आगे किस्तों में ले लिया जाए। वहीं इस दौरान फीस जमा न करने के कारण किसी भी बच्चे का नाम स्कूल से न काटा जाए और न ही उसे ऑनलाइन कक्षाओं से वंचित किया जाए। इस कठिन समय में स्कूल प्रबंधन भी अपनी भूमिका सक्रियता से निभाएं और बीमारी से लड़ने में मदद करें।

इससे पहले लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और नोएडा के डीएम ने आदेश दिया था कि वे अप्रैल और मई महीने में फीस नहीं जमा कराएंगे और न ही किसी छात्र का नाम काट सकेंगे। लखनऊ के डीएम अभिषेक प्रकाश ने रविवार को आदेश जारी करते हुए कहा था- अगर किसी भी अभिभावक को परेशान किया गया तो प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, कानपुर के डीएम डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी ने सभी बोर्ड के स्कूल संचालकों को आदेश दिया था कि वे अप्रैल और मई महीने में फीस नहीं जमा कराएंगे और न ही किसी छात्र का नाम काट सकेंगे। आगामी माह की फीस का चार्ट इसी आदेशनुसार तैयार करेंगे। वाराणसी के डीएम कौशल राज शर्मा ने कहा था जून तक कोई भी स्कूल किसी बच्चे की फीस जमा करने के लिए दबाव नहीं बनाएगा। इस अवधि की फीस जुलाई के बाद जमा कराई जा सकती है।

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