कोरोना वायरस ने रफ्तार पकड़ ली है। मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। ऐसे में मेडिकल संस्थानों में जांच का दबाव बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में अब तक 4000 से ज्यादा नमूनों की जांच हो चुकी है। अकेले केजीएमयू में करीब 3000 जांच हो चुकी हैं। अभी जांच के लिए छह से आठ घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। अधिक से अधिक लोगों की जांच हो सके इसके लिए केजीएमयू में रैपिड टेस्टिंग किट्स (आरटीके) कोविड-19 जांच की सुविधा शुरू होगी। कोरोना वायरस के संक्रमण का पता तीन से चार मिनट में चल जाएगा। उम्मीद है यह सुविधा इसी हफ्ते शुरू हो जाएगी।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने रैपिड टेस्टिंग किट्स कोविड-19 को मंजूरी दे दी है। जिस प्रकार से प्रेग्नेंसी जांचने के लिए किट होती है उसी प्रकार से यह किट भी होगी। खास बात यह है कि मेडिकल स्टोरों पर उपलब्ध नहीं होगी। जिन अस्पतालों में कोरोना वायरस की जांच हो रही है या जिन्हें सरकार ने अधिकृत किया है। वहीं पर यह किट उपलब्ध होगी।

इस संबंध में आईसीएमआर ने केजीएमयू में यह सुविधा उपलब्ध कराने की ओर इशारा किया है। शुक्रवार को केजीएमयू में विभागाध्यक्षों की बैठक में रैपिड किट की सुविधा उपलब्ध कराए जाने पर चर्चा भी हुई। केजीएमयू कुलपति डॉ. एमएलबी भट्ट ने कहा कि यह सुविधा कोरोना वार्ड में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ के लिए वरदान साबित होगी।

यह अंतर होगा
अभी अस्पतालों में एलाइजा जांच से कोरोना संक्रमण की पहचान हो रही है। इसमें मरीज की लार या फिर नाक के पानी से जांच हो रही थी। रैपिड टेस्टिंग खून की एक बूंद से हो जाएगी। इसकी रिपोर्ट भी तुरंत ही मिल जाएगी, जिनमें रिपोर्ट पॉजटिव आएगा उनकी एलाइजा जांच कराई जाएगी। किट आने से रैपिड जांच की संख्या में 20 फीसदी तक वृद्धि हो सकती है।

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