कोरोना जैसी महामारी से जंग और वित्तीय वर्ष के बदलने जैसी दो बाधाओं के बाद भी राज्य सरकार ने सभी कर्मचारियों को तत्काल वेतन दिए जाने का प्रबंध किया है। एक अप्रैल से ही कर्मचारियों के खाते में वेतन पहुंचने लगेगा। विभागों ने वेतन बिल बनाकर भुगतान के लिए लगा दिया है। बजट आवंटन का इंतजार किए बगैर ही वेतन मद में धनराशि कोषागारों से दिए जाने का इंतजाम है।

अमूमन मार्च का वेतन अप्रैल माह में नए वित्तीय वर्ष का बजट जारी होने के बाद मिलता रहा है, जिसकी वजह से पांच अप्रैल के बाद ही कर्मचारियों के खाते में वेतन पहुंचता था। इस बार राज्य सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है कि वेतन के लिए विभागों को बजट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वित्त विभाग के अधिकारियों के मुताबिक विभाग कोषागारों से वेतन मद में धनराशि ले लेंगे, फिर जब बजट जारी होगा तो कोषागार वेतन मद में दिए गए धनराशि का समयोजना कर लेंगे।
बता दें कि हर वित्तीय वर्ष में मार्च से फरवरी माह तक का वेतन ही बजट में दिया जाता है। चालू वित्तीय वर्ष का जो बजट था वह मार्च माह में फरवरी माह के वेतन वितरण के साथ ही समाप्त हो चुका है। मार्च  का वेतन चूंकि एक अप्रैल और उसके बाद दिया जाता है इसलिए यह धनराशि नये वित्तीय वर्ष के बजट से दी जाती है। जिसकी वजह से हर बार अप्रैल का वेतन मिलने में थोड़ा विलंब होता रहा है।

वित्त विभाग ने 27 मार्च को ही जारी कर दिया था शासनादेश
मार्च  का वेतन एक अप्रैल को कर्मचारियों के खाते में पहुंच सके इसके लिए वित्त विभाग ने 27 मार्च को शासनादेश जारी कर दिया था। जिसमें स्पष्ट लिखा है कि बजट आवंटन की प्रत्याशा में राज्य कर्मचारियों, बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, चिकित्सा आयुर्विज्ञान संस्थानों एवं चिकित्सा विश्वविद्यालयों के नियमित शिक्षण, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को मार्च 2020 के वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट की समस्त अनुदानों की मांग विधानमंडल द्वारा पारित होने के साथ ही बीते 24 मार्च को वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने के लिए विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर दिए गए थे। वित्त विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक अधिकांश विभागों ने वेतन बिल बनाकर जमा कर दिया है। एक अप्रैल से वेतन खातों में पहुंचने लगेगा। आउटसोर्सिंग कार्मिकों को भी समय से वेतन देने के लिए संबंधित एजेंसियों को दिशा निर्देश दिए गए हैं। बताया जाता है कि कोरोना से जंग में तेलंगाना और महाराष्ट्र के साथ ही कुछ अन्य राज्यों ने अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन में कटौती की है। समूह क के अधिकारियों के वेतन में 50 से 75 फीसदी तक जबकि समूह ग में 25 फीसदी वेतन राशि काटने का आदेश इन राज्यों ने दिया है। यूपी में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के वेतन मद से एक पैसे की भी कटौती नहीं की जा रही है। राज्य सरकार अपने बेहत वित्तीय प्रबंधन के कारण कोरोना से जंग भी लड़ रही है और गरीबों को राहत पहुंचाने के साथ ही कार्मिकों को समय से वेतन दिलाने का काम भी कर रही है।

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