facebookअरे क्या कहा कि फेसबुक के दिन लगने वाले हैं। लोग फेसबुक का साथ छोडऩे लगे हैं। आजकल सोशल साइट फेसबुक हमारे लाइफ का अहम हिस्सा बन चुका है। सोते जागते उठते बैठते खुशी हो दुख हर समय हम फेसबुक पर अपना स्टेटस अपडेट करते हैंण्ण्दोस्तों से चैट करते हैंण् लेकिन प्रिंसटन यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक रिसर्च के मुताबिक फेसबुक पर खतरा मंडरा रहा है। लोगों की दिलचस्पी अब फेसबुक में कम होने लगी हैण् इस रिसर्च के मुताबिक 2015 तक इस वेबसाइट का खात्मा हो सकता हैण् माईस्पेस जैसा ही होने के नाते फेसबुक के 80 प्रतिशत यूजर्स इससे अलग हो गए है। अगर आपको आश्चर्य हो रहा है तो यह बता दें कि माइस्पेश भी बुहत ही पॉपुलर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट है लेकिन 2008 में इसके 80 प्रतिशत यूजर्स कम हो गए थे इस रिसर्च के मुताबिक फेसबुक पहले ही अपने सेचुरेशन प्वाइंट पर पहुंच चुका है और अब यह अपने डिक्लाइन होने के फेज में है। उनके मुताबिक फेसुबक को प्लेग हो गया हैण् बीमारी जैसे आइडियाज संक्रमण की तरह लोगों में फैलते हैंए लेकिन एक समय ऐसा आता है कि उनकी मौत हो जाती है इन आइडियाज को महामारी विज्ञान के मॉडल की तरह समझा जा सकता है यह शायद थोड़ा हास्यापद भी लगें क्योंकि फेसबुक पर इस समय 873 मिलियन यूजर्स है लेकिन हम इस बात को नहीं नकार सकते कि जो जितनी जल्दी ऊपर की तरफ जाता है वह नीच भी उतनी ही जल्दी आता है।

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