कमलेश श्रीवास्‍तव

कहां तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये

कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिये ।

न हो क़मीज़ तो घुटनों से पेट ढक लेंगे

ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिये ।

ये तस्‍वीरें दुष्‍यंत कुमार की लाइनों में कितना फिट बैठती हैं देखिये ना। दिल्‍ली से लाखों का हुजुम जो सडकों पर दिख रहा है उनके चेहरों को जरा गौर से पढिये तो सही उन्‍हें अपनी नहीं अपने भविष्‍य की चिंता है। संकट की आहट से इनके माथे पर चिंता की लकीरें गहरा गई हैं। सब जल्‍द से जल्‍द अपने गांव घरों को लौटना चाहते हैं। इनके साथ बीवी बच्‍चे हैं और निकल पडे हैं लम्‍बे सफर पर। ये जब अपने गांव व घर से बाहर कमाने निकले थे तब इनके पास मुठठी भर उम्‍मीदें और झोले भर सपने थे। अब लाक डाउन के कारण उन्‍हें अपने सपनों के बिखरने का गम नहीं बल्कि जिगर के टुकडों की भूख की चिंता है। इन्‍हें अपनी जमीन याद आ रही है। इनकी जडें भी यहीं हैं। इन्‍हें पूरी उम्‍मीद हैं कि गांव घर में उनके बच्‍चों को कोई भूखा सोने नहीं देगा। जब ये सफर पर निकले थे तो इन्‍हें मालूम नहीं था कि सफर में ऐसे लोग भी मिलेंगे जो इनके दर्द को सोख लेंगे। अपने वतन लौटने के लिए हाईवे पर पैदल ही निकल पडे लाखों कामगारों की मदद के लिए हजारो हाथ निकल पडे। जो जिससे बन पडा वो कर रहा है। आटो वाला चाय वाला सब्‍जी वाला रिक्‍शा चलाने वाला यहां तक कि किन्‍नर व दिव्‍यांग तक अपनी चिंता छोड इनके आंसू पोंछने में जुटे हैं । ऐसी संवेदनाएं ऐसे बडे दिलवाले हमारे देश में ही मिलते हैं। जब दर्द पर सियासत भारी हो जब जिम्‍मेदार लॉकडाउन में हों तब बदसुलूकी के लिए बदनाम पुलिस हमारी मित्र बनती नजर आ रही है। बडे शहरों के कंक्रीट के घने जंगलों में लोक लुभावने हाईटेक सपने डीलिट हो रहे हों तो ऐसे में अपने गांव अपने खेतों में भविष्‍य नजर आ रहा है। घर लौटने की हडबडी में ये सभी भूल कर रहे हैं इनके पास कोई चारा भी नहीं है। हर किसी को जल्‍दी है जाने की। पुलिस का दोस्‍त बन कर खाना बांटने और लोगों का सडक पर आकर इनकी मदद करना दिल को बहुत सुकून दे रहा है लेकिन आशंकायें मंडरा रही हैं और भेड बकरी की तरह ट्रकों बसों में भर कर जा रहे लोग कहीं अपने साथ अपने घर तबाही तो नहीं ले जा रहे। सडकों पर से बेबसों का काफिला गुजर रहा है और राजकपूर की जिस देश में गंगा बहती है का ये गीत हवाओं में गूंज रहा है
आ अब लौट चलें
तुझकों पुकारे देश तेरा

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.