वेलिंगटन। न्यूजीलैंड के आधुनिक इतिहास में सबसे वीभत्स हमले को अंजाम देते हुए क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों में 51 लोगों को मौत के घाट उतारने वाले शख्स ने बृहस्पतिवार (26 मार्च) को अचानक सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया।

एक साल पहले हुए इस हमले ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था और इसके बाद खतरनाक अर्द्धस्वचालित हथियारों पर प्रतिबंध लगाने के लिए नए कानूनों को लाना पड़ा। हमलावर की इस अचानक स्वीकारोक्ति ने पीड़ितों और उनके रिश्तेदारों को हैरत में डाल दिया और न्यूजीलैंड के लोगों को राहत पहुंचाई।

कई लोगों को डर था कि ऑस्ट्रेलिया का श्वेत वर्चस्ववादी ब्रेंटन हैरिसन टैरेंट (29) अपने मुकदमे का इस्तेमाल अपने विचारों का प्रचार करने के मंच के तौर पर करेगा। उसने क्राइस्टचर्च उच्च न्यायालय में हत्या के 51 आरोप, हत्या की कोशिश के 40 आरोप और आतंकवाद के एक आरोप को स्वीकार कर लिया।

कोरोना के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर न्यूजीलैंड में भी इस समय लॉकडाउन चल रहा है जिस वजह से गुरुवार को क्राइस्टचर्च उच्च न्यायालय में सुनवाई को बहुत सीमित रखा गया था। सुनवाई में लोगों को आने की अनुमति नहीं दी गई और ब्रेंटन तथा उसके वकील को वीडियो लिंक के जरिए सुनवाई में शामिल किया गया। दोनों मस्जिदों के प्रतिनिधि इस सुनवाई में पीड़ित परिवार की ओर से शामिल हुए। ब्रेंटन को आगामी एक मई तक के लिए हिरासत में रखा गया है।

क्या था मामला
पिछले साल 15 मार्च को सैन्य वेशभूषा पहने बंदूकधारी ब्रेंटन हैरिसन टैरेंट ने क्राइस्टचर्च के अंदरुनी शहर अलनूर और लेनवुड मस्जिद में 51 दर्शनार्थियों की हत्या कर इंटरनेट पर लाइवस्ट्रीम कर दिया था। इस हमले में 49 लोग घायल हुए थे। न्यूजीलैंड की इतिहास में यह अबतक का सबसे भयानक हमला था जिसमे पुरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। न्यूजीलैंड सरकार ने इस हमले के कारण बंदूक रखने के कानून को और कड़ा कर दिया था।

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