मेरठ : कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंका के चलते जनता कफ्यरू और जनपदों को लॉक डाउन किया जा रहा है। इस दौरान मजदूरी न मिल पाने के कारण परेशान श्रमिकों, मजदूरों, रिक्शा, ठेला चलाने वालों को प्रदेश सरकार ने 1000 रुपये की आíथक मदद देने की घोषणा की है। यह मदद मंगलवार से उनके खातों में पहुंच सकती है। इसके लिए आज विभिन्न विभागों द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे। श्रम विभाग में पंजीकृत निर्माण कार्यों से संबंधित श्रमिकों के लिए सोमवार को मुख्यमंत्री खुद बोर्ड की बैठक करके नियमावली को स्वीकृति देंगे।
क्षेत्र के उप श्रम आयुक्त दीप्तिमान भट्ट ने बताया कि श्रम विभाग में निर्माण कार्यों से जुड़े असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का पंजीकरण होता है। वर्तमान में यहां डेढ़ लाख मजदूर पंजीकृत हैं लेकिन इनमें से 76 हजार ही सक्रिय हैं। जिन्होंने प्रत्येक तीव वर्ष में होने वाला अपने पंजीकरण का नवीनीकरण करा रखा है। प्रदेश सरकार द्वारा घोषित आíथक मदद पंजीकृत श्रमिकों, ग्राम विकास विभाग में पंजीकृत मनरेगा मजदूरों तथा नगर निगम में पंजीकृत रिक्शा ठेला मजदूरों को मिलेगी। लेकिन यह सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। उ.प्र भवन एवं सन्ननिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की बैठक मुख्यमंत्री करेंगे। जिसमें नई नीति को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद मंगलवार से पैसा श्रमिकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। श्रम विभाग के पास इसके लिए बजट उपलब्ध है। ग्राम विकास विभाग और नगर निगम अपने मजदूरों को यह मदद उपलब्ध कराएगा।
कोरोना पीड़ित श्रमिकों को 28 दिन का सवेतन अवकाश
शासन से प्राप्त आदेश के आधार पर मेरठ के उप श्रम आयुक्त दीप्तिमान भट्ट ने रविवार को आदेश जारी किया है। जिसके मुताबिक कोरोना के संदिग्ध मरीज के रूप में आइसोलेशन में रखे जाने वाले श्रमिकों को 28 दिन का भुगतान युक्त अवकाश प्रदान किया जाएगा। लेकिन इसके लिए संबंधित कर्मकार अथवा कर्मचारी को स्वस्थ होने के पश्चात चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। राज्य सरकार अथवा जिला मजिस्ट्रेट के आदेश से अस्थाई रूप से बंद होने वाली दुकानों, वाणिज्यिक अधिष्ठान, कारखानों के कर्मचारियों को उनके मालिकों द्वारा इस अवधि का मजदूरी सहित अवकाश प्रदान किया जाएगा।

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