कोरोना के खिलाफ लंबी लड़ाई की तैयारी रखनी होगी। स्वास्थ्य मंत्रलय के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि पूरी दुनिया में कोरोना का कहर खत्म होने में दो-तीन महीने से अधिक समय लग सकता है। यदि सरकार कोरोना फैलने की गति को कम करने में सफल रही तो न्यूनतम नुकसान के साथ इस लड़ाई को जीता जा सकता है। इसके लिए सामाजिक दूरी के लिए लोगों को जागरूक करने की कोशिशों के साथ ही सरकार ने कोरोना पर लगाम लगाने में सफल रहे चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से अनुभव साझा करने का अनुरोध किया है।
स्वास्थ्य मंत्रलय का मानना है कि दुनिया में अभी कोरोना का प्रकोप अपने चरम पर नहीं पहुंचा है और आगे इसमें और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। लेकिन एक तरफ जहां दुनिया में कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है, वहीं कई देश इसे रोकने में सफल भी रहे हैं। उनके अनुसार भारत सरकार उनके साथ संपर्क में है। चीन का उदाहरण सामने है जो 120 दिनों के भीतर वुहान में कोरोना को रोकने में सफल रहा। उनके अनुसार पिछले सात दिन से वुहान में कोरोना का एक भी केस सामने नहीं आया है। इसी तरह जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर भी कोरोना मरीजों की शुरुआती बढ़त को थामने में सफल रहा है।
जिन देशों में कोरोना प्रसार कम तेजी हुआ, वहां न तो चिकित्सा व्यवस्था चरमराई और न ही इससे होने वाली मौतों की संख्या बेतहाशा बढ़ी। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभी सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि कोरोना वायरस को कम्युनिटी ट्रांसमिशन के फेज तीन तक पहुंचने से कैसे रोका जाए और यदि कम्युनिटी ट्रांसमिशन हो तो भी उसकी इटली, चीन, ईरान और अन्य यूरोपीय देशों जैसी तीव्रता नहीं हो।
कम्युनिटी ट्रांसमिशन की गति को कम करने में सामाजिक दूरी की अहमियत को समझाते हुए स्वास्थ्य मंत्रलय के अधिकारी ने कहा कि यदि सामान्य रूप से एक व्यक्ति हर दिन ढाई लोगों को कोरोना से ग्रसित करता है, तो एक महीने में 400 लोग उससे ग्रसित हो चुके होंगे।
वहीं सामाजिक दूरी का पालन करने से यदि वह व्यक्ति इससे आधे लोगों को ही ग्रसित करने में सफल होता तो पूरे एक महीने केवल 115 लोग ही उससे ग्रसित होंगे। जाहिर है यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी और कोरोना के प्रसार की तीव्रता इससे कई गुना कम हो जाएगी।

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