इस्‍लामाबाद –  पाकिस्‍तान की एक विशेष अदालत ने राजद्रोह के मामले में पाकिस्तान के पूर्व राष्‍ट्रपति परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाई है। बीते पांच दिसंबर को विशेष अदालत ने सरकार अभियोग दल की दलीलें सुनने के बाद कहा था कि वह इस मामले में 17 दिसंबर को अपना फैसला देगी।

इससे पहले अदालत ने निर्देश दिया था कि 76 वर्षीय मुशर्रफ पांच दिसंबर को इस मामले में आकर अपना बयान दर्ज कराएं। हालांकि, मुशर्रफ की ओर से ऐसा नहीं किया गया था। इस मामले में कल यानी सोमवार को तब नया मोड़ आ गया था जब लाहौर हाईकोर्ट ने मुशर्रफ की याचिका पर पाकिस्तान सरकार को नोटिस जारी कर निर्देश दिया था कि वह इस्लामाबाद की विशेष अदालत के समक्ष लंबित राजद्रोह मामले की कार्यवाही पर रोक लगा दे।

अपने आवेदन में मुशर्रफ ने हाईकोर्ट से गुजारिश की थी कि वह विशेष अदालत में उनके खिलाफ राजद्रोह के मामले में लंबित सभी कार्यवाहियों को असंवैधानिक करार दे। इस मामले में बीते 28 नवंबर को ही अपना फैसला सुनाने वाली थी लेकिन मुशर्रफ और पाकिस्‍तान सरकार की याचिका पर इस्‍लामाबाद हाईकोर्ट ने विशेष अदालत को फैसला सुनाने से रोक दिया था। साथ ही मामले की सुनवाई पांच दिसंबर को करने के लिए कहा था।

इसके बाद विशेष अदालत ने मुशर्रफ को निर्देश दिया था कि वह इस मामले में पांच दिसंबर को अपना बयान दर्ज कराएं। लेकिन मुशर्रफ ने दुबई के अमेरिकन हास्‍पि‍टल से अपने एक वीडियो संदेश जारी कर तबियत खराब होने की बात कही थी। बता दें कि मुशर्रफ पर तीन नवंबर 2007 को अतिरिक्‍त संवैधानिक आपातकाल लागू करने के आरोप हैं।

पाकिस्‍तान की पीएमएल-एन सरकार ने उनके खिलाफ साल 2013 में यह मामला दर्ज किया था। इस मामले की सुनवाई विशेष अदालत की जस्टिस वकार अहमद सेठ की अध्‍यक्षता वाली तीन सदस्‍यीय ट्रिब्‍यूनल ने की है। पाकिस्‍तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, यद‍ि मुशर्रफ को इस मामले में दोषी करार दिया जाता है तो उन्‍हें फांसी की सजा हो सकती है। पाकिस्‍तान के इतिहास में मुशर्रफ ऐसे पहले सेना प्रमुख हैं जिनपर 31 मार्च 2014 को देशद्रोह के मामले में आरोप तय किए गए हैं।

रिपोर्ट – एजेंसी इनपुट

 

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