नई दिल्ली – केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले और मौजूदा कार्यकाल में रेलवे की कमाई घट गई है. रेलवे की कमाई 10 साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 10 साल में सबसे खराब दर्ज किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार रेलवे ने 1-2 रुपये की कमाई के लिए 98.44 रुपये का खर्च किया था. CAG ने रेलवे का घाटा कम करने और आय को बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए हैं.

कैग ने 3 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए टिकट अनिवार्य करने का सुझाव दिया है, इसके अलावा सांसदों और पूर्व सांसदों को मिलने वाली रियायत का 75 फीसदी खर्च संसदीय कार्य विभाग द्वारा उठाए जाने के लिए सुझाव दिया गया है. वहीं प्रिविलेज पास पर टिकट की बुकिंग को पूरी तरह से मुफ्त करने के बजाय 50 फीसदी रियायत करने का सुझाव है.

रेलवे के रिजर्व टिकट किराये के तहत दी जाने वाली सभी रियायतें कुल यात्री टिकट के आय का 11.45 फीसदी है. रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे रियायतों का काफी बड़ा हिस्सा (52.5 फीसदी) अपने कर्मचारियों को प्रिविलेज पास के तौर पर देकर खर्च कर देता है. बता दें कि रेलकर्मियों और उनके परिवारीजनों को प्रिविलेज पास के तौर पर साल में 1 से 6 यात्राओं तक 100 फीसदी रियायत दी जाती है.

इसके अलावा इससे ज्यादा बार इस सुविधा का लाभ लेने के लिए किराये में 66.67 फीसदी रियायत दी जाती है. रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015-18 तक प्रिविलेज पास की वजह से भारतीय रेलवे ने 2759.25 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया था.

कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि AC क्लास में प्रिविलेज पास के उपयोग में सालाना 5.7 फीसदी की दर बढ़ोतरी हुई है. बता दें कि मौजूदा समय में भारतीय रेलवे द्वारा 53 प्रकार की रियायतें दी जाती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक एसी क्लास में रोजाना औसतन 667 रुपये और नॉन एसी में 157 रुपये की रियायत दी जाती है. हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक प्रीमियम ट्रेनों में सामान्य यात्रियों के लिए किसी भी प्रकार की रियायत की व्यवस्था नहीं की गई है.

रिपोर्ट – एजेंसी इनपुट

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