लखनऊ – लोकसभा में सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन बिल संसद में पेश कर दिया. बिल को लेकर उत्तर प्रदेश के सियासी दल में विरोध की तस्वीर सामने आ रही है. बसपा ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वह इस बिल का विरोध करेगी. इस बीच अखिलेश यादव ने ट्वीट कर बिल को भारत और संविधान का अपमान बताया है. अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है कि न किसान की आय दुगनी हुई, न गंगा साफ़ हुई, न अर्थव्यवस्था में सुधार लाए, न काला धन वापस लाए, न नौकरियां लाए, न बेटियों को बचा पाए, न विकास कर पाए, मैंने पहले कहा था: इनकी राजनीति ध्यान हटाने और समाज बांटने की है. #CitizenshipBill भारत का और संविधान का अपमान है.

बता दें इससे पहले बसपा के सांसद कुंवर दानिश अली ने कहा है कि नागरिक संशोधन बिल  के मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी संसद के दोनों सदनों में विरोध करेगी. उन्होंने कहा कि यह बिल भारत के सविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के लिखित संविधान के खिलाफ है. इसलिए बिल का बहुजन समाज पार्टी विरोध करेगी.

नागरिक संशोधन बिल को लेकर विपक्षी पार्टियों को जवाब देने हुए यूपी बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि लोगों को इस बिल को मजहबी दृष्टि से देखने की जरूरत नहीं है. ये मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में खतरा बने लोगों को चिन्हित किया जाएगा. इस पर किसी को आपत्ति नहीं होने चाहिए. वहीं विदेशों में हिंदुओं की स्थिति ठीक नहीं है, अगर कोई हिंदू वापस भारत आना जाता है तो उसे सहूलियत दी जाएगी.

नागरिकता संशोधन बिल नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया जा रहा है, जिससे नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव होगा. नागरिकता बिल में इस संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा.

रिपोर्ट – न्यूज नेटवर्क 24

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