लखनऊ -में जीवन के गूढ़ रहस्य छिपे हैं। इसलिए गीता को सभी धर्म मानते हैं। गीता में मनुष्य को जीवन द्वंद्व से बाहर निकलने का रास्ता बताया गया है। सामाजिक चेतना का विकास चेतन मानस की वह शक्ति है जो आंतरिक और बाह्य तत्वों, वस्तुओं, विषयों और व्यवहार का ज्ञान अनुभव कराती है। चेतना को उस ज्ञानात्मक मनोवृत्ति, ज्ञानात्मक दृष्टिकोण एवं विवेक शक्ति के रूप में स्वीकार किया गया है।

महाभारत काल में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता के ज्ञान का उपदेश देते हुए बोलें कि समस्याएं चाहे कितनी भी बड़ी हों, यदि व्यक्ति में उसका सामना करने की सक्षमता है तो फिर वह उसके आगे बौनी बन जाती है।लखनऊ चिन्मय सेवा ट्रस्ट बैनर तले गीता ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।

जो दिनांक 1 दिसंबर से लेकर 7 दिसंबर तक ( रविवार से शनिवार) चलेगा। ज्ञान यज्ञ पूज्य स्वामी सुबोधानंद सरस्वती जी महाराज के आशिर्वाद से संपन्न हो रहा है. जो  सांय 6.30 से 8.30 है। पूज्य स्वामी की पीयूषमयी वाणी में क्रमानुसार आप सपरिवार एवं मित्रों सहित सादर आमंत्रित हैं।

यह गीता ज्ञान यज्ञ अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान विपिन खंड, गोमती नगर लखनऊ ( संगीत नाट्य अकादमी के बगल में) में हो रहा है। अधिक जानकारी के लिए संस्था के संपर्क सूत्र 9621566546 पर ब्रह्मचारी कौशिक चैतन्य जी महाराज व 98339805333 पर श्री मती उषा गोविंद प्रसाद जी महाराज से सम्पर्क किया जा सकता है।

रिपोर्ट – अमित चावला 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.