कानपुर। कानपुर के गंगा बैराज के पार उन्नाव के गाँवों में उत्तर प्रदेश में युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के तकनीकी प्रेम ने भू-माफिया की सक्रियता बढ़ा दी है. कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण कर तकनीकी और औद्योगिक उपयोग तथा रिहायशी योजनाओं के विकास की खबर आते ही गंगा कटरी की हर साल गंगा की बाढ़ में जल-मग्न हो जाने वाली जमीनों की मांग और मारामारी तेज कर दी है. एक तरफ देश में कृषि-योग्य जमीनों के औद्योगिक और रिहायशी भू-अधिग्रहण के खिलाफ देश-व्यापी आंदोलन चल रहा है दूसरी तरफ गंगा और पर्यावरणीय हितों की उपेक्षा करते हुए मिट्टी को सोना बनाने की शह जारी है. प्रदेश सरकार के मुखिया की मंशा को संतुष्ट करने के लिए नियमों और कानूनों ताक पर रखकर भू-माफिया और नौकरशाह इस खेल में संलिप्त हैं.

उन्नाव के शंकरपुर गाँव का किसान राम लाल बताता है, कानपुर में गंगा-बैराज का निर्माण शहर की पेयजल समस्या के निदान के लिए किया गया था. कभी शहर के विस्तार की संभावनाओं और कृषि योग्य भूमि में निवेश की चाहत में शहर के नव-धनाढ्य वर्ग ने पुल बन जाने के बाद उन्नाव के गाँवों में जमीनें खरीदनी शुरू कर दी थीं. देखते-देखते दस हज़ार रुपये बीघे की जमीनें पांच लाख रुपये प्रति बीघे की हो गयीं. हम किसानों में ही एक खास वर्ग दलाल और भू-माफिया का एजेंट हो गया. हाल में प्रदेश में नयी सरकार के आते ही युवा मुख्यमंत्री के तकनीकी प्रेम के चलते इस क्षेत्र में टेक्नोलोजी पार्क और रिहायशी योजना के विकास करने की घोषणा ने जमीनों के दामों में आग लगा दी है. कानपुर विकास प्राधिकरण और यू. पी. एस. आई. डी. सी. की सक्रियता ने भू-माफिया और उसके दलालों की सक्रियता इस क्षेत्र में बढ़ा दी है. उन्नाव में पूर्व में शंकरपुर, मनभौना, कन्ह्वापुर की लगभग 1200 एकड़ जमीनें अधिग्रहीत की थीं जिनमें अब हाई-टेक सिटी बनाया जाना है.

देश भर में कृषि और पर्यावरणीय हितों की रक्षा हेतु सरकारी भू-अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन चला रहे पी. वी. राजगोपाल का कहना है प्रदेश सरकार को ऊसर और बंजर भूमि के विकास के कार्यक्रमों की समीक्षा करनी चाहिए और औद्योगिक और रिहायशी उपयोग हेतु इस तरह की जमीन का अधिग्रहण किया जाना चाहिए. माननीय उच्चतम न्यायालय ने पूर्व में ही गंगा सहित देश की सभी नदियों के किनारे पूर्वे में बाढ़ के उच्चतम बिंदु से सौ मीटर की जमीन के अधिग्रहण और नव-निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है. के. डी. ए. की गंगोत्री योजना और यू. पी. एस. आई. डी. सी. हाई-टेक सिटी योजना माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अवहेलना साबित होगी. आगरा से लखनऊ को जोडऩे वाले मार्ग में तमाम ऊसर और बंजर जमीनें हैं जहां पर इस तरह की योजनाओं को विकसित किया जा सकता है. शीघ्र ही केन्द्र सरकार कृषि-योग्य जमीनों के भू-अधिग्रहण को रोकने के लिए कानून में परिवर्तन करने जा रही है. इस योजना से प्रभावित गावों के बाशिंदे बताते हैं की भू-माफिया और अधिकारियों के दलालों मौके का अधिकतम लाभ कमाने के लिए ग्राम-समाज की जमीनों की फर्जी रजिस्ट्रियां करनी शुरू कर दी हैं, जिससे भोले-भाले नव-धनाढ्य निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई को बचा नहीं पा रहे हैं.

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