नई दिल्ली-  जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में फीसवृद्धि और नये हॉस्टल नियमों का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. आज यानी 18 नवंबर को जेएनयू छात्रसंघ ने संसद तक मार्च निकाल दिया है. कैंपस के बाहर धारा 144 लागू होने के बावजूद ये मार्च निकाला गया है. दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि जेएनयू छात्रों को पार्लियामेंट तक नही जाने दिया जाएगा. पार्लियामेंट के आसपास भी धारा144 लगी हुई है.

जेएनयू छात्रसंघ बढ़ी फीस के अलावा अन्य मुद्दों पर भी मार्च निकालेगा. छात्र संघ की ओर से जारी पर्चे में कहा गया है कि फरवरी 2019 के सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक सेकेंड्री और हायर से 94,036 करोड़ रुपयों का इस्तेमाल नहीं किया गया. सीएजी रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि 7298 करोड़ रुपये रिसर्च और विकास कार्यों में खर्च होने थे जो नहीं हुए.

छात्र संघ का दावा है कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी ने पब्लिक फंडेड एजुकेशन के दरवाजे विदेशी और कॉर्पोरेट शिक्षा के लिए बंद कर दिए हैं. क्या इसी वजह से ऐसा हुआ है. 5.7 लाख करोड़ बैड लोन और 4 लाख करोड़ टैक्स रिबेट्स कॉर्पोरेट को दिए गए. लेकिन पब्लिक फंडेड एजुकेशन के लिए कुछ नहीं दिया गया.

छात्र संघ ने देश के सांसदों से सवाल किया है कि बढ़ी हुई फीस पर वे साथ देंगे. क्या सभी के लिए वे पब्लिक फंडेड एजुकेशन की मांग करेंगे. क्या वे पब्लिक फंडेड एजुकेशन पर हो रहे प्रहार को रोकेंगे? छात्र संघ का कहना है कि छात्र आगे बढ़कर मांग करें साथ ही नीति निर्माताओं को इस बात का जवाब देने दें कि शिक्षा अधिकार है, विशेषाधिकार नहीं.

केरल से राज्यसभा सांसद ए. करीम ने जेएनयू के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर इस बात दुख जताया कि उन्हें जेएनयू कैंपस में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने से रोक दिया गया. उन्होंने कहा कि मुझे रविवार को प्रदर्शनकारी छात्रों को संबोधित करना था और इसके लिए मैं दिल्ली भी पहुंच गया था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से शामिल नहीं हो पाया. इन छात्रों को मेरा समर्थन है. बता दें कि जेएनयू प्रशासन ने सांसद को जेएनयू में चल रहे स्टूडेंट्स के प्रोटेस्ट में शामिल ना होने के लिए लेटर लिखा था.

रिपोर्ट – न्यूज नेटवर्क 24

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