बिहार – गड़हांचल के युवा किसान संतोष सिंह अब सभी के लिए नजीर बनते जा रहे है। उन्होंने आधुनिक खेती को अपना कर मुनाफे संग कई नई प्रजातियों से भी अच्छी पैदावार कर रहे है। वह महंगे बिकने वाले चावल ब्लैक राइस की खेती कर दूसरों किसानों के लिए उदाहरण पेश कर दिए है। राष्ट्रीय किसान विकास संघ इन दिनों बिहार में ब्लैक राइस की खेती को प्रोत्साहित कर रहा है। संस्था के मार्गदर्शन में बिहार के विभिन्न जिलों के अनेक किसानों ने प्रायोगिक तौर पर इसकी खेती शुरू की है।

राष्ट्रीय किसान विकास संघ के लव कुश ने बताया कि बिहार में इस चावल की खेती पिछले साल कुछ किसानों के द्वारा सफलतापूर्वक की गई थी, जिससे यह प्रमाणित होता है कि यहां इसकी खेती संभव है। हालांकि बिहार में अभी इसका सीमित बाजार है फिर भी इस बात की प्रबल संभावना है कि जागृति आने के बाद इसका उपभोग का दायरा काफी बढ़ जाएगा और अपनी पौष्टिकता के कारण सबकी थाली में इसकी मौजूदगी होगी।

लव कुश के अनुसार, ब्लैक राइस की खेती भारत में सबसे पहले मणिपुर में शुरू हुई। यह एंटी ऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर माना जाता है। यूं तो कॉफी और चाय में भी एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं लेकिन काले चावल में इसकी मात्रा सर्वाधिक होती है। ब्लैक राइस के सेवन से बॉडी को डि‍टॉक्स होती है और कई तरह की सेहत संबंधी परेशानि‍यां दूर रहती हैं। एंटी ऑक्सीडेंट हमारे शरीर की विषाक्त बीमारियों से लड़ता है। इसे कैंसर के इलाज के लिए सब से ज्यादा उपयोगी माना जाता है। आम सफेद चावल के मुकाबले इसमें ज्यादा विटामिन बी और ई के साथ कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और जिंक की भी मात्रा ज्यादा होती है।

रिपोर्ट- न्यूज नेटवर्क 24

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