Verghese Kurienश्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन की जीवटता आज के युवाओं के लिए एक मिसाल है। शहर की चकाचौंध से प्रभावित युवा जहां अपना गांव कस्बा छोडऩे में जरा सी भी देर नहीं लगाते वहीं विदेश में पढ़ाई कर केरल की बजाय गुजरात के एक गांव को अपनी कर्मभूमि बनाना डॉ कुरियन के बूते की ही बात थी। न सिर्फ अपने लिए बल्कि पूरे देश के लिए सपने बोना और उन्हें एक वटवृक्ष का आकार देना आसान नहीं था लेकिन कुरियन ने सिर्फ सपने देखे बल्कि उसे साकार भी किया। 26 नवम्बर1921 को केरल में जन्मे डॉ. कुरियन ने गुजरात को अपनी कर्मभूमि बनाया। डॉ. कुरियन 13 मई 1949 को आणद आ आए कुरियन के लिए चुनौतियां कम न थी। केरल के ईसाई समुदाय का होने के कारण कोई उन्हें अपना घर देने को तैयार नहीं था। यहां आणद डेयरी में नौकरी करने के साथ ही कुरियन के मन में भारत को दूध के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का सपना भी था। त्रिभुवन नारायण पटेल ने कठिन समय में कुरियन की मदद की उन्हें अपने गैराज में रहने की व्यवस्था की। गुजरात के आणद में पहले दुगध संघ की नींव पड़ी। आणद डेयरी की सरकारी नौकरी छोड़ इस संघ में शामिल हुए कुरियन ने जो किया वह इतिहास बन गया। दूध को सुरक्षित रखने के लिए कुरियन ने 11 महीने की मेहनत के बाद जो मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट तैयार किया वह उस समय तक देश का सबसे आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट था। यहीं शुरू हुआ अमूल ब्रांड का दूध। कुरियन के दूध की प्रोसेसिंग, आधुनिक मार्केटिंग ने किसानों की किस्मत ही बदल दी। दूध के सुरक्षित होने के साथ ही उनका भविष्य भी सुरक्षित हो गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने कुरियन के इस प्रयास का प्रयोग राष्टï्रीय स्तर पर किया और पहली बार देश में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड का गठन हुआ। दिल्ली की मदर डेयरी और कई अन्य राज्यों के सहकारी दुग्ध संघ इसी बोर्ड की देन हैं। कुरियन की एक महत्वूपूर्ण उपलब्धि यह है कि उन्होंने भैंस के दूध का पाउडर बना कर दुनिया अचंभित कर दिया। इससे पहले माना जाता था कि गाय के दूध से ही पाउडर बनाया जा सकता था । भारत में दूध उत्पादन का मुख्य आधार गाय नहीं भैंस रही हैं इस बात को कुरियन अच्छी तरह से जानते थे। तभी उन्होंने कड़ी मेहनत कर भैस के दूध को पाउडर में बदल कर दिखाया। श् वेत क्रांति के जनक डॉ कुरियन को भारत सरकार ने पदमश्री, पदमभूषण, कृषि रत्न, पदम विभूषण जैसे अवॉर्डों से सम्मानित किया। साथ ही विदेशों में भी उन्हें कई सम्मान मिले। आणंद मिल्क यूनियन और डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड पर कुरियन लम्बे समय तक काबिज रहे। बावजूद इसके कि वे निर्वाचित प्रतिनिधि थे और प्रचार से सदैव दूर रहते थे। यह भी सच है कि 60 की उम्र के बाद भले ही वे लगातार चेयरमैन के पद के लिए चुने जाते रहे, लेकिन इस उम्र के बाद उन्होंने कभी एक भी पैसा वेतन के रूप में नहीं लिया। भ्रष्टïाचार के इस दौर में कुरियन का चरित्र एक मिसाल है। ऑपरेशन फ्लड के जरिए भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाने वाले कुरियन हमारे दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे।

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