sarabjeet singhएक बार फिर सरबजीत की रिहाई की उम्मीद बनी है। पाकिस्तान में पिछले 20 वर्षों से मौत की सजा पाए लाहौर की जेल में बंद सरबजीत पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी ने भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा को गम्भीरतापूर्वक विचार करने का भरोसा दिलाया है। भारत व पाकिस्तान के रिश्ते दोस्ती की राह पर आगे बढ़े हैं। पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार की भारतीय विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद पाकिस्तानी जेलों में बंद सभी भारतीय मछुआरों को तत्काल रिहा करने के आदेश दे दिए हैं। पाकिस्तान की विदेश मंत्री ने कहा है कि हम पुरानी बातों को छोड़ कर आगे बढ़ रहे हैं। हमें इतिहास से सीखना चाहिए न कि इसका गुलाम होना चाहिए। भारत व पाकिस्तान के बीच सरल वीजा समझौते पर हस्ताक्षर होने से दोनों देश के बीच सम्बन्धों की एक नई राह खुलती दिख रही है। इस समझौते के बाद पाकिस्तान जाना आसान हो जाएगा। इन सबके बीच पाक राष्ट्रपति जरदारी ने अधिकारियों से सरबजीत से जुड़े कागजात जल्द से जल्द तैयार करने को कहा है जिससे सरबजीत को लेकर पाकिस्तान का सकारात्मक रुख सामने आया है। मालूम हो कि इन दिनों भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा पाकिस्तान के दौरे पर हैं और सरबजीत मामले पर उन्हें पाकिस्तान का सकारात्मक रुख देखने को मिला है। हाल ही में सरबजीत के वकील ओवैश शेख ने भी दावा किया है कि पाकिस्तान सरकार सरबजीत को रिहा करने का मन बना चुकी है। कुछ दिनों पहले सरबजीत ने आरोप लगाया था कि लाहौर जेल के अधिकारी उसे दूषित खाना दे रहे हैं जिसे खाना मुश्किल है और उसके साथ दुव्र्यवहार किया जा रहा है। सरबजीत की इस शिकायत पर भारत सरकार हरकत में आई थी जिसके बाद पाकिस्तान की ओर से सरबजीत को भारतीय वाणिज्य दूतावास से सम्पर्क करने की विशेष सुविधा दी गई है। इसी वर्ष मई में एक लाख भारतीयों ने राष्ट्रपति आसिफ जरदारी को पत्र लिखकर डॉक्टर खलील चिश्ती के बदले सरबजीत की रिहाई के लिए गुहार लगाई थी लेकिन पाक सरकार ने सरबजीत की रिहाई पर अपने कान बंद कर लिए थे। दरअसल, सरबजीत निर्दोष है और पाक सेना ने उसे विस्फोट मामले में फंसा कर जबरन जेल में रखा है। सरबजीत सिंह को 1990 में पाकिस्तान के लाहौर और फैसलाबाद में हुए चार बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान में सरबजीत सिंह को मनजीत सिंह के नाम से गिरफ्तार किया गया था। अपने बचाव में सरबजीत ने तर्क दिया कि वो निर्दोष है और भारत के तरन तारन का किसान है। गलती से उसने सीमा पार की और पाकिस्तान पहुंच गया लेकिन फिर भी सरबजीत पर जासूसी के आरोप लगे। इसके बाद उस पर लाहौर की एक अदालत में मुकदमा चला और पहली बार में ही 1991 में न्यायाधीश ने उनको मौत की सजा सुना दी गई। सरबजीत के वकील ओवैश शेख ने कोर्ट में दावा किया कि सरबजीत बेगुनाह है और वो मनजीत सिंह के अपराध की सजा काट रहा है। अभी कुछ महीने पहले जब सरबजीत की रिहाई की खबर आई थी और यह कहा जा रहा था कि सरबजीत की फांसी की सजा उम्रकैद में बदल गई है और उम्रकैद सरबजीत काट चुका है इसलिए पाकिस्तान सरकार उसे रिहा कर रही है लेकिन आईएसआई के दबाव में आकर जरदारी अपने फैसले से पलट गए। पाकिस्तान सरकार ने सरबजीत की जगह तीस वर्षों से कैद भारतीय कैदी सुरजीत को छोड़ा था। जरदारी पर तब सेना, विपक्ष व आईएसआई का जबरदस्त दबाव था। अब भी हालात बहुत ज्यादा नहीं बदले हैं। अभी तक पाकिस्तान सरकार ने सरबजीत सिंह की फांसी की सजा को उम्रकैद में भी नहीं बदला है लेकिन पाकिस्तान के बदले रुख और जेल में बंद सभी मछुआरों की रिहाई से सरबजीत की रिहाई की उम्मीद एक बार फिर जग गई है। सरबजीत पाकिस्तान की जेल में बंद सिर्फ एक भारतीय कैदी ही नहीं बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठïा से जुड़ चुके हैं। सरबजीत का रिहा होना अब जरूरी हो गया है। भारत ने सरबजीत मामले पर पाकिस्तान के सामने इस बार जोरदार ढंग से मामला उठाया है। सरबजीत की रिहाई की उम्मीद के साथ दिल के किसी कोने में पाकिस्तान सरकार के पलटी मारने का डर भी है। अधिकतर मामलों में उसने भारत का भरोसा तोड़ा ही है। इस बार दोनों देशों के बीच रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल रही है। उम्मीदें एक बार फिर परवान पर हैं। सरबजीत के परिजन ही नहीं करोड़ों भारतीय भी बेकसूर सरबजीत की भारत आने की राह तक रहे हैं।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.