Jaguar-XF-sedan
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डीजल कीमत पर सरकार की नीतिगत सुस्ती की वजह से कार कंपनियां देश में अपनी निवेश योजना को अंतिम रूप नहीं दे पा रही हैं. मारुति, हुंडई और टोयोटा डीजल कारों के निर्माण पर नया निवेश करना चाहती हैं लेकिन सरकार की तरफ दो टूक फैसला नहीं होने की वजह से अंतिम निर्णय नहीं कर पा रही हैं. ऑटो कंपनियों की प्रतिनिधि संस्था सोसायटी ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (सियाम) ने सरकार से डीजल कीमत पर फैसला करने के साथ ही डीजल कारों पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाने का भी आग्रह किया है.

सियाम की गुरुवार को यहां हुई सालाना बैठक में डीजल कारों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का मुद्दा छाया रहा. ऑटोमोबाइल उद्योग को इस बात की चिंता है कि डीजल कारों पर एकमुश्त टैक्स लगाने से डीजल कारों की बिक्री पर विपरीत असर पड़ेगा. सियाम के अध्यक्ष एस. शांडिल्य का कहना है कि पेट्रोल कारों की बिक्री पहले से ही काफी नीचे पहुंच गई है. ऐसे में डीजल कारों पर अतिरिक्त बोझ डालने से इसकी बिक्री भी घट जाएगी. डीजल कीमत पर फैसला नहीं कर पा रही केंद्र सरकार डीजल कारों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है. पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था. कुछ दिन पहले ही वित्त मंत्रालय में देश की बड़ी कार कंपनियों के प्रमुखों और सियाम के आला अधिकारियों के साथ इस विषय पर विचार-विमर्श भी हुआ है.
सीआइआइ के अध्यक्ष आदि गोदरेज का कहना है कि, ‘डीजल कारें देश की कुल डीजल का महज दो फीसद खपत करती हैं. ऐसे में सरकार इन पर अतिरिक्त टैक्स लगा कर भी डीजल खपत पर खास काबू नहीं पा सकती. मगर इसके विपरीत असर जरूर होंगे.Ó डीजल की खुदरा कीमत पेट्रोल से लगभग 30 रुपये प्रति लीटर कम है. इस वजह से डीजल कारों की मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है. मगर इन कारों का उत्पादन कम होने से ग्राहकों को महीनों प्रतीक्षा करनी पड़ती है. मारुति, हुंडई, टोयोटा सहित कई अन्य कंपनियां भारत में नए डीजल प्लांट लगाना चाहती हैं, ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके.
सूत्रों के मुताबिक तीनों बड़ी कंपनियां देश में डीजल प्लांट लगाने पर एक-एक हजार करोड़ रुपये निवेश करने को तैयार हैैं. मगर इन्हें डर है कि अगर सरकार ने डीजल की कीमत विनियंत्रित कर दी या डीजल कारों पर टैक्स लगा दिया तो बिक्री घट सकती है. सरकार पिछले दो साल से इस मुद्दे को लटकाए हुए है.

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