Pradeep shukla
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एनआरएचएम घोटाले के आरोपी प्रदेश के पूर्व प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रदीप शुक्ल की परेशानियां और बढ़ गई हैं. हाई कोर्ट की सख्ती के चलते अब उनके लिए और मुश्किलें आने वाली हैं. आपराधिक मामलों में राहत पाने की आस में हाई कोर्ट आए शुक्ला को वहां से निराशा हाथ लगी है. हाई कोर्ट ने प्रदीप शुक्ल के खिलाफ सही समय पर जांच रिपोर्ट पेश न किए जाने पर केंद्र सरकार व सीबीआइ से नाराजगी जताते हुए व्यक्तिगत हलफनामा देकर शिथिलता बरतने का कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने भारत सरकार के वैयक्तिक लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के सचिव से सीबीआइ की रिपोर्ट का अनुमोदन करने में विलंब के लिए भी स्पष्टीकरण मांगा है. न्यायालय ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदन में देरी के कारण आरोपी आइएएस प्रदीप शुक्ल को जमानत मिल गई.
न्यायालय ने सीबीआइ के पुलिस अधीक्षक से भी व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है कि 90 दिन के भीतर सीबीआइ ने पुलिस रिपोर्ट कोर्ट में क्यों दाखिल नहीं की. न्यायालय ने शुक्ला की याचिका को जनहित याचिका मानते हुए अगली सुनवाई की तारीख 25 सितंबर नियत की है.
शुक्ल ने गाजियाबाद नोएडा में दर्ज पांच आपराधिक मामलों की प्राथमिकी को चुनौती दी है कि सीबीआइ को बिना केंद्र सरकार का अनुमोदन लिए प्राथमिकी दर्ज करने का अधिकार नहीं है.

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