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एंटीबायोटिक दवाओं के लगातार बढ़ते इस्तेमाल और उनसे पैदा हो रही प्रतिरोधी क्षमता से चिंतित सरकार न्यू जेनरेशन की ऐसी 91 दवाओं की सीधी बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए मानसून सत्र के बाद अधिसूचना जारी की जा सकती है. इसके बाद ये दवाएं चिकित्सकों की सलाह पर ही उपलब्ध हो सकेंगी.

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया (डीसीजीआइ) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को इस बाबत पत्र लिखा है, जिसने मंजूरी के लिए उसे विधि मंत्रालय के पास भेजा है. इसके बाद 91 ऐसी दवाओं के लेबल पर ‘आरएक्सÓ और बिना चिकित्सकीय सलाह के उन्हें न बेचने की चेतावनी भी अंकित करना अनिवार्य होगा. गौरतलब है कि अनुसूची एच-1 की दवाओं में प्रमुखता से यह मुद्रित किया जाता है कि डाक्टर की बिना सलाह के इन्हें लेना नुकसानदेह साबित हो सकता है. डीसीजीआइ इस सूची में आने वाली दवाओं की खुदरा दुकानों से बिक्री को लेकर ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स के तहत जारी निर्देशों के अनुपालन के लिए राज्य सरकारों के ड्रग कंट्रोलरों को पहले ही लिख चुका है. इसमें यह भी कहा गया है कि ड्रग इंस्पेक्टर दवाखानों का औचक निरीक्षण कर यह देखें कि अनुसूची एक्स और अनुसूची एच के तहत वर्गीकृत दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह के न बेची जा रही हों. स्वास्थ्य मंत्रालय ने पूर्व में नोटिफिकेशन का एक ड्राफ्ट जारी किया था जिससे संबंधित पक्षों की राय ली जा सके.
एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से उनके प्रति पैदा हुई प्रतिरोधी क्षमता की समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक टास्क फोर्स का गठन किया था. प्रतिरोधी क्षमता विकसित होने पर ये दवाएं निष्प्रभावी हो जाती हैं. टास्क फोर्स ने एंटीबायोटिक दवाओं की एक अलग अनुसूची तैयार कर उनकी बिक्री के   संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने की सिफारिश की थी.

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