नगर आयुक्त नागेंद्र प्रसाद सिंह नगर विकास मंत्री आजम खां के कोपभाजन के शिकार बन गए। शहर में गंदगी को लेकर नगर विकास मंत्री उनसे नाराज चल रहे थे। गंदगी को आधार बनाते हुए उन्होंने करीब दो माह पूर्व शासन से उनके निलम्बन की संस्तुति की थी। शासन ने देर शाम उन्हें नगर आयुक्त के पद से हटा दिया है। बहरहाल उन्हें अभी प्रतीक्षा सूची में रखा है। नगर आयुक्त नागेंद्र प्रसाद सिंह का सख्त रवैया नगर निगम पर ज्यादा दिन नहीं चल पाया। नागेंद्र प्रसाद सिंह को नगर आयुक्त के पद पर कांटों का ताज मिला था। उन्होंने नगर आयुक्त का पद भार ग्रहण करने के बाद करीब 200 करोड़ के कर्ज में डूबे नगर निगम की माली हालत को सुधारने का खासा प्रयास किया था। एलडीए समेत तमाम विभाग से निगम का बकाया धन वसूल था। नागेंद्र प्रसाद सिंह ने निगम के अभियंत्रण विभाग के साथ अन्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगाई थी। उन्होंने ठेकेदारों के किए गए कार्य का भुगतान भी रोक दिया था। इसके साथ ही नगर आयुक्त ने जेएनएनयूआरएम के तहत चल रहे विकास कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी जल निगम और अन्य कार्यदायी संस्था के पेच कसे। जल निगम के पेयजल और सीवर लाइन की गुणवत्ता का जिम्मा नहीं लेने पर उनकी धनराशि रोक दी थी और इसके अलावा सफाई और कूड़ा प्रबंधन संयंत्र के लिए कार्यदायी संस्था ज्योति इनवायरोटेक पर भी काफी सख्ती अपनाई थी। माना जा रहा है कि नगर आयुक्त का यह सख्त रवैया नगर विकास मंत्री को नागवार गुजरा। उनके इस कदम से वे काफी नाराज चल रहे थे। मुख्यमंत्री आवास के पास गंदगी देख नगर विकास मंत्री ने इसे आधार बनाते हुए उनके शासन से उनके निलम्बन की संस्तुति की थी। मीडिया में नगर आयुक्त के निलम्बन पर उठाए गए सवाल के बाद वे बाद में नरम पड़ गए थे। शासन की ओर से उन पर सख्ती कर दी गई थी। आलम यह था कि शासन के निर्देश पर जेएनएनयूआरएम के तहत चल रहे विकास कार्य की जल निगम द्वारा गुणवत्ता की जिम्मेदारी लिए बगैर नगर निगम को भुगतान करना पड़ा था। इसके बाद भी नगर आयुक्त निगम के हित में कई अहम प्रस्ताव शासन को भेजा था। माना जा रहा है कि नगर आयुक्त की सख्ती के चलते तभी नगर विकास मंत्री से उनकी ठन गई थी। नगर आयुक्त भी उनसे टकराव नहीं लेते हुए कुछ दिन छुट्टïी पर चले गए थे।

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