गजलकार मनीष शुक्ला के गजल संग्रह ‘ वाब पत्थर हो गए’

का विमोचन रविवार को संगीत नाटक अकादमी में प्रसिद्ध शायर
प्रोफेसर मलिक जादा मंजूर अहमद ने किया। इस अवसर पर उन्होंने
कहा कि यह पुस्तक जिंदगी के तमाम वास्तविक संदर्भों को रेखांकित
करती है। आज के समाज की सच्चाई को उजागर करती है। पुस्तक
विमोचन कार्यक्रम का आयोजन इद्रा-ए-लौह ओ-कलम के द्वारा किया
गया जो एक साहित्यिक संस्था है।
मु य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रोफेसर फज्ल-ए-इमाम रिजवी ने कहा
कि पुस्तक की सारी गजलें परिपक्व हैं। पाठकों पर अपना प्रभाव
छोडऩे में सक्षम हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो शारिब
रुदौलवी ने कहा कि वाब पत्थर हो गए संग्रह की अधिकांश गजलें
नयापन और नया तेवर लिए हुए हैं। पुस्तक विमोचन के मौके पर
उपस्थित चर्चित हिंदी व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि जो
मुकाम हिंदी गजलों में दुष्यंत कुमार का है वही मुकाम उर्दू गजल
में मनीष शुक्ला को हासिल है। वरिष्ठï पत्रकार अहमद इब्राहीम अलवी
ने कहा कि मनीष की शायरी सादगी के साथ बड़ी बात व्यक्त करती है।
कहानीकार फय्याज रिफत के अनुसार यह कृति मानवीय संदर्भों को
जीवंत करती है।
दूरदर्शन के पूर्व निदेशक विलायत जाफरी ने कहा कि आज ऐसी
शायरी की जरूरत है जो समाज को दिशा दे सके।

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