gopal kanda
Gopal Knda v/s Gitika

हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा को गीतिका शर्मा से खास लगाव था. गीतिका से उसका संबंध कुछ ऐसा था जो चाहत से कहीं बढ़कर था. शायद इसलिए गोपाल कांडा के लिए गीतिका  अहम जरूरत बन गई थी. कांडा किसी भी हालत में इसका संसर्ग चाहता था. इसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार था. एकेजी इन्फ्रा सोसायटी नाम की कंपनी का नाम सामने आने से इस संभावना को और बल मिला है.

गीतिका शर्मा खुदकुशी कांड की जांच आगे बढऩे के साथ ही कांडा का कच्चा चिट्ठा भी खुलता जा रहा है. हवाई चप्पल बेचने वाली एक छोटी सी दुकान से हवाई जहाज उड़ाने वाली कंपनी का मालिक बनने तक कांडा ने ऐसा बहुत कुछ किया जिसे जानकर आपको हैरत होगी. कांडा भले ही अब कह रहा हो कि खुदकुशी करने के डेढ़ महीने पहले से गीतिका से उसकी बात या मुलाकात नहीं हुई थी लेकिन यह भी सही है कि कांडा की राजदार अरुणा चड्ढ़ा करीब रोज फोन करके गीतिका से दफ्तर आकर कुछ कागजों पर दस्तखत करने के लिए दबाव डाल रही थीं. सवाल यह उठता है कि एक कंपनी की निदेशक और समूह के कई अहम पदों पर होने के बावजूद गीतिका क्यों दफ्तर नहीं जा रही थी और कौन से कागजों पर दस्तखत करने से बच रही थी?

कांडा और गीतिका के आर्थिक रिश्ते भी जांच का एक बड़ा विषय हैं. इसी जांच में सुराग मिला है कि कांडा ने गीतिका के नाम कोई बड़ी प्रॉपर्टी ले रखी है. जब यह प्रॉपर्टी ली गई थी तब दोनों के रिश्ते मधुर थे और गीतिका उन्हें सुखद अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश में थी. कांडा भी उसके लिए तैयार था, बस अपनी सयानी हो रही लड़कियों की शादी तक इंतजार करने को कहा था लेकिन जैसे ही गीतिका को कांडा की असलियत पता चली और अंकिता, नूपुर मेहता सहित कई लड़कियों के नाम सामने आए, रिश्ते में कड़वाहट घुल गई. इसी के बाद गीतिका ने एमडीएलआर एयरलाइंस की नौकरी छोड़ दी और दुबई जाकर दूसरी नौकरी करने लगी

तब उसे कांडा हर हाल में वापस लाने के प्रयास में लग गया. पता चला है कि कांडा ने अरुणा चड्ढा के साथ दुबई जाकर गीतिका को मनाने का प्रयास भी किया लेकिन बात नहीं बनी. तब फर्जी मेल भेजकर गीतिका को दुबई में जेल जाने का भय दिखाया गया. कांडा का यह प्रयास कामयाब रहा और गीतिका वापस भारत आ गई. उसी दौरान कांडा अपनी पत्नी के साथ गीतिका के दिल्ली स्थित घर आया और उसने गीतिका के मम्मी-पापा के माध्यम से उसे एमडीएलआर में काम करने के लिए तैयार किया. तभी उसे साढ़े सात लाख रुपये देकर एमबीए कराने का लालच दिया गया और महज बीए पास लड़की को कंपनी का गैर शेयर होल्डर निदेशक बनाया गया

बताते हैं इस सबके बाद कांडा अपनी प्रॉपर्टी वापस पाने के प्रयास में लगा. इसी वजह से एक बार फिर से उसके गीतिका के साथ रिश्ते तनावपूर्ण हो गए. इन्हीं तनावपूर्ण रिश्तों की परिणति गीतिका की खुदकुशी के रूप में हुई

ढांचागत सुविधाओं के लिए कांडा ने एकेजी इन्फ्रा सोसायटी नाम की कंपनी खड़ी थी और उसका वाइस प्रेसिडेंट गीतिका शर्मा को बनाया था. सूत्रों के अनुसार एकेजी में ए का मतलब अरुणा चड्ढा, के का मतलब खुशबू और जी का मतलब गीतिका है. खुशबू कांडा से नजदीकी रिश्तों वाली एक मॉडल है. इस कंपनी और कुछ अन्य कंपनियों की संपत्तियों की जांच भी इसी उद्देश्य से की जा रही है|

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