P CHIDAMBARAM
P CHIDAMBARAM gets relief by SC

करप्शन के मुद्दे पर घिरी सेंट्रल गवर्नमेंट को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट नेबड़ी राहत दी. सुप्रीम कोर्ट ने 2जी घोटाले में वित्तमंत्री पी चिदंबरम को पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के साथ सह अभियुक्त बनाने की अपील खारिज कर दी. साथ ही कोर्ट ने उनके खिलाफ सीबीआइ जांच का आदेश देने की मांग भी ठुकरा दी है.

न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी व न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन की पीठ ने सुब्रमण्यम स्वामी व गैर सरकारी संगठन सीपीआइएल की याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं. स्वामी ने चिदंबरम को सहअभियुक्त बनाने और सीपीआइएल ने उनके खिलाफ सीबीआइ जांच का आदेश मांगा था. स्वामी ने फैसले पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि वे फैसले से असंतुष्टि हैं और पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे. सरकार के लिए बेहद अहम इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 2जी मसले पर खराब प्रबंधन की आशंका को तो खारिज नहीं किया, लेकिन इसे आपराधिक साजिश मानने से इन्कार कर दिया. उन्होंने कहा कि गलत फैसला या सही ढंग न अपनाना और खराब प्रबंधन आपराधिक साजिश नहीं मानी जा सकती. पेश सामग्री से यह नहीं साबित होता कि चिदंबरम ने राजा के साथ साजिश रचकर कम शुल्क तय करके अपने पद का दुरुपयोग किया. न ही यह साबित होता है कि चिदंबरम ने जानबूझकर स्वान और यूनीटेक को अपनी हिस्सेदारी घटाने की अनुमति दी थी. यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम को क्लीन चिट देने के विशेष अदालत के फैसले में दखल देने से मना कर दिया.
अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ ऐसा कोई सुबूत या सामग्री नहीं मिली है, जिससे यह निष्कर्ष निकलता हो कि चिदंबरम ने अपने पद (2जी आवंटन के समय वित्तमंत्री) का दुरुपयोग किया है. चिदंबरम के भ्रष्ट तरीके अपनाकर खुद या ए राजा या अन्य किसी को लाभ पहुंचाने के साक्ष्य भी नहीं हैं. 2जी और 3जी स्पेक्ट्रम की कीमतें तय करने के लिए चिदंबरम और राजा 29 मई और 12 मई 2008 को मिले जरूर थे, लेकिन सिर्फ इस बैठक से किसी साजिश के होने का मतलब नहीं निकाला जा सकता. इससे पहले वित्त सचिव और दूरसंचार सचिव बैठक कर चुके थे. उस बैठक में उनके बीच सहमति बन चुकी थी कि जिन लोगों के पास पहले से 6.2 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम है, उनसे नया आवंटन करते समय अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा. ऐसे में यह आरोप निराधार है कि चिदंबरम ने राजा के साथ साजिश रचकर अपने अधिकारियों के नजरिये को नकार दिया था. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ वित्त मंत्रालय व दूरसंचार विभाग के अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श और मंत्रियों के बीच बैठक होने भर से आपराधिक साजिश स्पष्ट नहीं होता. संदेह कितना भी पुख्ता क्यों न हो, वह कानूनी साक्ष्य का स्थान नहीं ले सकता. लिहाजा चिदंबरम को आरोपी नहीं बनाया जा सकता.

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.