vulture in new danger
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विलुप्त होने की कगार पर खड़े गिद्धों पर दर्द निवारक दवा एसिक्लोफेनाक का नया खतरा मंडराने लगा है. पशुओं को बड़े पैमाने पर दी जाने वाली यह दवा गिद्धों के लिए जहर बनती जा रही है. एक नए शोध के तहत यह बातें कही गई हैं.

राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरनेरी एंड एनिमल रिसर्च में पक्षियों पर शोध करने वाले प्रदीप शर्मा ने अपने शोध पत्र में एसिक्लोफेनाक के प्रतिकूल प्रभाव की समीक्षा करते हुए कहा कि इसकी आणविक संरचना प्रतिबंधित दवा डाईक्लोफेनाक से काफी मिलती-जुलती है. डाईक्लोफेनाक पशुओं के जोड़ों के दर्द ठीक करने में मदद करती है. इस दवाई को खाने के बाद मरे पशु को खाने से गिद्धों के गुर्दे खराब जाते हैं और वह मरने लगते हैं. डाईक्लोफेनाक के घातक प्रभाव को देखते हुए ही इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था.
शर्मा के मुताबिक, ‘एसिक्लोफेनाक प्रतिबंधित डाईक्लोफेनाक का ही दूसरा रूप हैं, जो पशुओं के मेटाबॉलिज्म पर एक जैसा ही प्रभाव दिखाती हैं. इस शोध के तहत पशुओं के शरीर में एसिक्लोफेनाक के डाईक्लोफेनाक में बदल जाने का परीक्षण काफी महत्वपूर्ण है और इसके सफल होने पर यह साबित हो जाएगा कि एसिक्लोफेनाक गिद्धों के लिए खतरनाक है.Ó शर्मा द्वारा पेश किए गए शोधपत्र में सभी पशु चिकित्सकीय दवाओं को स्वीकृति दिए जाने से पहले उनके व्यापक मूल्याकंन का मसौदा तैयार करने पर जोर दिया गया है. शर्मा ने पशु दवाओं की आणविक संरचना पर ध्यान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है.

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