जमीयत उलेमा हिंद द्वारा शुक्रवार को आयोजित विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसक हो गया.  असम और म्यांमार की हिंसा में अल्पसंख्यकों पर हुए असर के विरोध में शुक्रवार को अलविदा की नमाज के बाद कई उत्तर प्रदेश में लखनऊ, कानपुर और इलाहाबाद में भीड़ हिंसक हो उठी. विरोध की बयार जम्मू-कश्मीर में भी चली लेकिन वहां लोगों के हिंसक होने की खबर नहीं है.

संगमनगरी इलाहाबाद में नमाज के बाद जुलूस निकाल रहे कुछ लोगों को जब पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो वे उग्र हो गए. जुलूस में शामिल युवकों ने पथराव शुरू कर दिया। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई. उपद्रवियों ने घंटाघर से लेकर जानसेनगंज तक दुकानों में तोडफ़ोड़ और लूटपाट की। यहां पर तोडफ़ोड़ का विरोध करने पर दो गुटों में पथराव हुआ, जिससे सड़क किनारे खड़े 200 से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त हो गए.

कानपुर में यतीमखाना स्थित नानपारा मस्जिद में कुछ युवकों ने काली पïट्टी बांधकर नमाज अदा की और नमाज के बाद असम की हिंसा को लेकर भड़काऊ भाषण देना शुरू कर दिया. इसके बाद सभी नारे लगाते नवीन मार्केट की ओर बढऩे लगे. वहां पर भीड़ को समझाया जाता, तब तक यतीमखाना चौराहे से सैकड़ों युवकों की भीड़ साइकिल मार्केट में पथराव कर दिया. इससे वहां भगदड़ मच गई. कई लोगों के घायल होने और दुकानों में नुकसान की खबर है. स्थिति संभालने के लिए डीआइजी अमिताभ यश वहां पहुंचे, तभी पता चला कि रजबी रोड पर कुछ युवक दुकानें बंद करा रहे हैं. डीआइजी फोर्स के साथ रजबी रोड पहुंचे तो युवकों ने उन पर पथराव कर दिया. डीआइजी ने खुद टीयर गैस गन उठाकर भीड़ को ललकारा तब भीड़ वापस भागी.
असम व म्यांमार में हुई हिंसा के विरोध में शुक्रवार को कश्मीर के महिला अलगाववादी संगठन दुखतरान-ए-मिल्लत ने प्रदर्शन किया. उसने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों पर जोर दिया कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा पर रोक लगवाएं.मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुसलमीन (एमआइएम) के अध्यक्ष असादुद्दीन ओवैसी ने उत्तर-पूर्व के लोगों को हैदराबाद न छोडऩे की सलाह दी है. रमजान के आखिरी जुमे की नमाज के बाद मक्का मस्जिद में स्थानीय सांसद ओवैसी ने कहा कि उन्होंने अंजैया नगर और सिद्दीक नगर इलाकों में जाकर वहां बसे उत्तर-पूर्व के लोगों से मुलाकात की.

मारपीट, तोडफ़ोड़ व लूटपाट पर उतारू उपद्रवियों ने चुन-चुन कर मीडियाकर्मियों को निशाना बनाया और उन पर जानलेवा हमला किया. इस दौरान दर्जनों मीडियाकर्मियों को गंभीर चोटें आईं और उनके कैमरे लूट लिये गये. उपद्रवियों ने पेट्रोल पंप फूंकने की भी कोशिश की.

पुलिस की मामूली संख्या को देखते हुए चापड़, तलवारों और लाठी-डंडों से लैस उपद्रवियों के हौसले इस कदर बुलंद हो गये कि वे तोडफ़ोड़ करते हुए विधानभवन तक बेरोकटोक  आ पहुंचे. पुलिस प्रशासन की लाचारी का ही नतीजा था कि हजरतगंज बाजार में भी उपद्रवियों ने जमकर हंगामा काटा जिसके चलते वहां भगदड़ मच गई. दोपहर करीब दो बजे नमाज समाप्त होने के बाद बाहर निकली भीड़ ने विधानभवन की ओर कूच का एलान कर दिया. हाथों में चापड़, तलवारें और लाठी-डंडे लिये उपद्रवियों की भीड़ विधानभवन की ओर चल पड़ी. पुलिस की मामूली संख्या ने उनके हौसले और बुलंद कर दिये. उपद्रवी रास्ता रोके खड़ी पुलिस और आरएएफ को धकियाते हुए आगे बढऩे लगे.
सबसे पहले उपद्रवियों ने बुद्धा पार्क में तोडफ़ोड़ शुरू कर दी. गार्ड््स ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन उनकी जमकर पिटाई हो गई. इसके बाद उपद्रवियों ने पार्क में बनी दुकानों में लूटपाट की और हाथी पार्क जा पहुंचे. वहां भी जानवरों की मूर्तियां तोड़ डाली. पार्क में खेल रहे बच्चे और वहां मौजूद महिलायें भी उपद्रवियों के गुस्से का शिकार हुईं. इस घटना को कवर कर रहे मीडियाकर्मियों को भी उपद्रवियों ने घेर लिया और उनके संग मारपीट शुरू कर दी. बेखौफ उपद्रवी मीडियाकर्मियों के कै मरे लूटने लगे लेकिन एक भी पुलिसकर्मी उनकी मदद को नहीं आया. इसी दौरान उपद्रवियों ने मीडियाकर्मियों की गाडिय़ों को भी निशाना बनाया और उनमें आग लगा दी.
इसके बाद करीब एक हजार उपद्रवियों का जत्था हजरतगंज की ओर चल पड़ा. एएसपी पूर्वी राजेश कुमार व आधा दर्जन कॉन्सटेबल भी उनके साथ हो लिये. पूरे रास्ते उपद्रवी बगल से निकलने वाली गाडिय़ों को तोड़ते हुए आगे बढ़ रहे थे लेकिन उनके साथ चल रहे पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने अथवा टोकने की हिम्मत नहीं की.
तोडफ़ोड़, मारपीट करते हुए उपद्रवी अब धरनास्थल जा पहुंचे. जहां उनका मंच पहले से तैयार था और नेताओं की तकरीरें चल रही थीं. इसी बीच कुछ उपद्रवियों ने पड़ोस में चल रहे ऑल इंडिया सम्यक बैकवर्ड बुद्धिजीवी इम्प्लाइज समिति के धरने पर हमला बोल दिया और वहां भाषण दे रहे समिति के प्रांतीय महामंत्री बीडी मौर्या की जमकर पिटाई कर दी. उपद्रवियों ने समिति का मंच तोड़ दिया और वहां लगे नेताओं की पिक्चर्स में आग लगा दी.
 लखनऊ में शुक्रवार को अलविदा की नमाज के बाद जो उपद्रव हुआ. वह पूरी तरह प्री प्लान था, एक सप्ताह पहले से ही जमीअत ए उलेमा ए हिंद ने पुराने लखनऊ में पोस्टर और बैनर लगा दिए थे. जिसमें अपील की गई थी कि वह भारी तादाद में इस प्रदर्शन में जुटें. संगठन ने इसके लिए अलविदा जुमे को चुना क्योंकि इस दिन सबसे ज्यादा भीड़ होती है.  मुम्बई में जो कुछ हुआ उसकी जानकारी पुलिस को थी लेकिन उसके बाद भी इसे पुलिस का फेल्योर ही कहा जाएगा कि पुलिस इस संगठन के नाम पर ध्यान न दे सकी. इसके बाद एलआईयू नहीं चेती, जिसका नतीजा आम जनता को उठाना पड़ा. नमाजियों को रोकने के लिए मौके पर पुलिस बल ना के बराबर था. इसका फायदा भीड़ में शामिल शरारती तत्वों ने उठाया. नमाजी अपने साथ हथियार लेकर नहीं आते है. मगर जब प्रदर्शन शुरु हुआ तो भीड़ में बहुत से उपद्रवियों के पास तलवारें, भाले, चापड़ और लाठियां थीं. आखिर इनके पास यह हथियार कहां से आए.
Hungama in lucknow
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