भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के दूसरे मून मिशन चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग अगले हफ्ते हो सकती है। सभी तकनीकी खामियों को ठीक कर लिया गया है। इससे पहले चंद्रयान-2 को 15 जुलाई की रात 2.51 बजे देश के सबसे ताकतवर बाहुबली रॉकेट GSLV-MK3 से लॉन्च किया जाना था। जो लॉन्चिंग व्हीकल सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण टाल दी गई। इसरो के सूत्रों के मुताबिक चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग 22 जुलाई की दोपहर 2.52 मिनट पर होगी।

इसरो के विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि क्रायोजेनिक स्टेज के कमांड गैस बॉटल में प्रेशर लीकेज था। इसमें हीलियम भरा था। यह क्रायोजेनिक इंजन में भरे लिक्विड ऑक्सीजन और लिक्विड हाइड्रोजन को ठंडा रखने का काम करता है। हीलियम लीकेज की वजह से मिशन को रोकना पड़ा। बॉटल में हीलियम का प्रेशर लेवल नहीं बन रहा था। यह 330 प्वाइंट से घटकर 300, फिर 280 और अंत में 160 तक पहुंच गया था। इसलिए लॉन्च को रोकना पड़ा।

15 जुलाई के बाद अब तक क्या किया इसरो वैज्ञानिकों ने सबसे पहले बाहुबली जीएसएलवी-एमके3 रॉकेट के सभी स्टेज से प्रोपेलेंट (ईंधन) निकाला। इसरो वैज्ञानिकों की योजना थी कि पूरे जीएसएलवी-एमके 3 को अलग-अलग किया जाएगा, लेकिन ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ी। सिर्फ उस हिस्से को निकालकर ठीक कर दिया है, जिसमें खामी थी।

इसरो वैज्ञानिकों ने हीलियम गैस बॉटल को बदल दिया है। साथ ही उस वॉल्व को भी ठीक किया है, जिससे प्रेशर लीक हो रहा था। आज यानी 18 जुलाई को दिनभर टेस्ट करने के बाद शाम को इसरो की एनालिसिस कमेटी सारे टेस्ट के परिणामों की जांच करेगा। साथ ही जीएसएलवी-एमके 3 रॉकेट के उन हिस्सों की क्लीनिंग होगी, जिसमें से ईंधन निकाला गया था।

इसके बाद रॉकेट के सभी हिस्सों की एसेंबलिंग यूनिट में ले जाकर दोबारा एसेंबलिंग की जाएगी। फिर इसे लॉन्चपैड-2 पर ले जाया जाएगा. इसके बाद लॉन्च से कुछ घंटे पहले रॉकेट के विभिन्न हिस्सों में ईंधन भरा जाएगा।

यह संभावना भी है कि इसरो वैज्ञानिक लॉन्चिंग के बाद पृथ्वी के चारों तरफ चंद्रयान-2 के 5 चक्कर को घटाकर 4 कर दें। हालांकि इसमें ईंधन थोड़ा ज्यादा खर्च होगा। पृथ्वी की कक्षा में कमी करने से आगे की यात्रा के लिए समय बचेगा।

अभी चांद की दूरी थोड़ी ज्यादा हो गई है तो ऐसा भी हो सकता है कि चांद पर पहुंचने के बाद भी वैज्ञानिक चांद के चारों तरफ लगाए जाने वाले चक्करों को भी कम कर सकते हैं।

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