सोमवार को यौन उत्पीडऩ के मामले में आसाराम की जमानत याचिका उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दी है। गुजरात सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति एन. वी. रमन की अध्यक्षता वाली पीठ को जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले की सुनवाई चल रही है और अब भी 210 गवाहों के साथ पुछताछ होनी बाकी है।

जिसके बाद याचिका खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि निचली अदालत सुनवाई जारी रखेगी और आसाराम की याचिका खारिज करते हुए गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा कही गई बातों से प्रभावित नहीं होगी।

आपको बता दें कि सूरत की रहने वाली दो बहनों ने आसराम और उनके बेटे नारायण साई के खिलाफ बलात्कार करने और बंधक बनाकर रखने की शिकायत दर्ज करायी थी। जिसके बाद कोर्ट ने आसाराम को जेल भेज दिया था।

आसाराम और चार अन्य सह आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत छह नवंबर 2013 को पुलिस ने आरोपपत्र दायर किया था। पीड़िता ने आसाराम पर उसे जोधपुर के नजदीक मनाई इलाके में आश्रम में बुलाने और 15 अगस्त 2013 की रात उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था।

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