लखनउ। लोकसभा चुनाव में सपा को गठबंधन करने पर तगड़ा नुकसान हुआ है। हालांकि सीटों में कमी नहीं आई है लेकिन जो राजनीतिक नुकसान हुआ है उसका असर 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव पर साफ साफ दिखेगा। गठबंधन से अखिलेश को भले ही नुकसान हुआ हो लेकिन बसपा ने खूब फायदा उठाया है। पिठले लोकसभा चुनाव में खाता तक न खोल पाने वाली बसपा ने एक झटके में 10 सीटें अपनी झोली में डाल ली हैं। सपा का वोट तो बसपा को मिला लेकिन बसपा का वोट सपा नहीं पा सकी। कन्नौज से डिम्पल यादव और बदायूं से धर्मेन्द्र यादव की हार इसका जीता जागता उदाहरण है।
मोदी लहर पर सवार उत्तर प्रदेश ने लोकसभा चुनाव में भाजपा को एक बार फिर जोरदार समर्थन दिया है। भाजपा ने प्रदेश की 80 में से 62 सीटें जीती हैं। इसके अलावा बसपा ने 10, सपा ने पांच, अपना दल-सोनेलाल ने दो और कांग्रेस ने एक सीट जीती है।
तो अब सोचिए UP में सपा बसपा गठबंधन का नुकसान किसको सबसे ज्यादा हुआ। चुनाव से पहले गठबंधन-गठबंधन चिल्ला रहे अखिलेश यादव को गठबंधन का सबसे बड़ा नुकसान हुआ। अखिलेश यादव की सपा ने गठबंधन के तहत 37 सीटों पर चुनाव लड़ा और केवल 5 सीटें जीतीं। अखिलेश की पत्नी भी चुनाव हार गईं। आंकड़े बता रहे हैं कि सपा को अगर गठबंधन का पूरा वोट मिला होता तो सपा के लिए बेहतर नतीजे हो सकते थे। सपा को पिछले लोकसभा चुनाव में पांच सीटें मिलीं थीं। तब मुलायम परिवार के पांच सदस्य ही लोकसभा में पहुंचे थे। बाकी सारे प्रत्याशी हार गए।
अब बात BSP की। 2014 में मायावती की पार्टी को 0 सीट मिली थीं। उस वक्त लगा कि अब मायावती का जनाधार लगभग खत्म हो गया है लेकिन अखिलेश ने हाथी को खड़ा कर दिया। 2019 में बसपा को 10 सीटें मिल गई हैं। तो गठबंधन का फायदा सिर्फ मायावती को हुआ।

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