पूरे देश में जनता कमल खिला रही है। जातीय समीकरण मोदी समीकरण पर भारी पड़े हैं। वोटबैंक और वंशवाद की राजनीति का तो दम ही निकाल दिया है इस बार के जनादेश ने।

लोकसभा चुनाव 2019 के सभी सीटों पर रुझान आ गए हैं। यह रुझान पूरी तरह से उन एग्जिट पोल को सही ठहरा रहे हैं, जिन्होंने इस बार देश में फिर से भाजपा सरकार बनने का दावा किया था। आपको बता दें कि देश के इतिहास में पहली बार बहुमत के साथ किसी गैर कांग्रेसी दल की सत्ता में दोबारा वापसी हो रही है। यह परिणाम काफी हद तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे को सामने रखने के कारण आए हैं। कई उम्मीदवार चुनाव के कुछ समय पहले ही पार्टी में शामिल हुए थे, जो जीत के कगार पर खड़े हो गए हैं। इसमें सनी देओल, रवि किशन, गौतम गंभीर आदि नाम शामिल हैं। 19 मई को आए एग्जिट पोल के परिणामों में 10 में से 09 में एनडीए की सरकार आने के दावे किए गए थे। उत्तर प्रदेश में साक्षी महराज और रविकिशन रेकार्ड जीत की ओर बढ चुके हैं।
देश में वंशवाद और जातिवाद की घृ‌णित राजनीति खत्म करने के लिए आपको इस आदमी का अहसानमंद होना पड़ेगा। यूपी बिहार के नतीजे इसके गवाह हैं। याद रखिए ये चुनाव ऐतिहासिक है। इस चुनाव ने जात, पात वोट बैंक, क्षेत्रवाद के तानेबाने को ध्वस्त कर दिया। जाति की राजनीति करने वाले बसपा और सपा जैसे दलों के अब अंत का समय आ गया है। 2014 के नतीजों से ही ये साफ हो गया जब बसपा को यूपी में एक भी सीट नहीं मिली थी और सपा चुनाव लड़कर भी 5 सीटों में निपट गई थी। 2019 के चुनाव में दोनों जाति आधारित दल गठबंधन के बावजूद कोई चमत्कार नहीं दिखा सके। बिहार में यही हुआ। कर्नाटक में यही हुआ। तो क्या जातिवादी क्षेत्रीय दलों का युग खत्म हो रहा है?
इसका एक कारण है। नई पीढी ने जातिवाद को खारिज कर दिया है। उन्हें समझ में आ गया है कि मायावती हो या लालू-मुलायम सिंह यादव परिवार। सबने जातिवादी राजनीति के बहाने केवल अपना घर भरा। ये भी तीस साल पहले उनकी तरह गरीब घर से ऊपर उठे थे और उन्हीं के वोटों की राजनीति ने उन्हें अरबपति बना दिया। लोकतंत्र में आप किसी को हमेशा बेवकूफ नहीं बना सकते।

चौंकाने वाले सामने आ रहे परिणाम

सुबह से ही लोकसभा चुनाव के रुझान आगे शुरू हो गए हैं। दिग्गजों की बात करें तो ज्यादातर जगह पर एनडीए के उम्मीदवार ही आगे चल रहे हैं। कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका अमेठी से लगता दिखाई दे रहा है। जहां राहुल गांधी भाजपा की स्मृति ईरानी से पिछड़ते दिख रहे हैं। वहीं गुजरात की गांधीनगर सीट से अमित शाह आगे चल रहे हैं। वीआईपी सीट रायबरेली से सोनिया गांधी आगे चल रही हैं। वहीं आजमगढ़ से उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आगे चल रहे हैं, उन्हें भाजपा के दिनेश लाल निरहुआ चुनौती दे रहे थे। वहीं लखनऊ से भाजपा के राजनाथ सिंह उम्मीद के मुताबिक ही बढ़त बनाए हुए हैं।

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