बहुचर्चित राफेल केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार को क्लीन चिट दिए जाने की खबरों पर विपक्ष ने सवाल उठाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने इस मामले के कानूनी पहलुओं को लेकर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। शनिवार को एक प्रैस कॉन्फेंस के दौरान उन्होंने उच्चतम न्यायालय के फैसले के कई पैरे पढ़े और सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को क्लीन चिट नहीं दी है।

सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जब तकनीकी पक्ष और राफेल डील की प्राइसिंग की जांच ही नहीं की तो सरकार ‘क्लीन चिट’ का दावा कैसे कर रही है? कांग्रेस नेता ने कहा कि राफेल में कथित भ्रष्टाचार, कीमत, तकनीक आदि की जांच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट उचित अथॉरिटी नहीं है। उन्होंने कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि SC ने खुद कहा है कि उसका अधिकार क्षेत्र सीमित है। सिब्बल ने कहा, ‘ कोर्ट ने कहा है कि तकनीकी तौर पर क्या सही है, यह हम तय नहीं कह सकते हैं। कोर्ट ने कहा है कि हम कीमतों और तकनीक पर फैसला नहीं कर सकते हैं और इस खरीद की प्रक्रिया का जहां तक सवा है तो राफेल एक दमदार प्लेन है।’

कांग्रेस नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में प्रेस रिपोर्ट और सरकार के हलफनामे का हवाला दिया गया है। उन्होंने कहा कि फैसले में कुछ ऐसे तथ्य हैं जो शायद सरकार के हलफिया बयान के कारण सुप्रीम कोर्ट के फैसले में आए हैं। यदि सरकार कोर्ट में गलत तथ्य पेश करती है तो उसके लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है न कि कोर्ट। उन्होंने आगे कहा कि 2G, कोल स्कैम में भी तमाम आरोप लगाए गए, लेकिन सभी आरोप फिक्शन निकले। हम साबित करके रहेंगे कि राफेल केस में हम सही हैं।

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