मुंबई : आजाद मैदान में शनिवार को असम की हिंसा के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान भड़के दंगे को लेकर सांप्रदायिक तनाव फैल गया है। पुलिस सूत्रों ने आरोप लगाया है कि दंगा पूर्वनियोजित था। पुलिस का दावा है कि इस इलाके में बड़े पत्थर पाए हैं जो निश्चित रूप से मैदान में नहीं थे। कुछ लोग इन पत्थरों को लेकर आए थे। आयोजकों के कहने पर 18 से 25 साल के युवाओं ने पत्थरबाजी की। सूत्रों ने कहा कि शुक्रवार की रात मुंबई अमन कमेटी ने अपने मुसाफिरखाना दफ्तर में बैठक की थी और वहां तय किया था कि वे शनिवार को होने वाले प्रदर्शन में भाग नहीं लेंगे क्योंकि उनके सूत्रों ने मुंबई पुलिस को बताया था कि दंगा हो सकता है।

पटनायक की बोलती बंद

मुंबई पुलिस आयुक्त अरूप पटनायक का करीब 30-40 लोगों की नाराज भीड़ से सामना हो गया। मुंबई के पुलिस आयुक्त अस्पताल में पहुंचे तो भीड़ मेंं शामिल लोग जानना चाहते थे कि दो युवकों को पुलिस की गोली कैसे लगी? भीड़ से एक व्यक्ति चिल्लाया, ‘इन दो युवकों को क्यों मरना पड़ा?Ó उनमें से एक के दो बच्चे हैं अब उनकी देखभाल कौन करेगा? पटनायक की बोलती बंद हो गई। इससे पहले शाम में पटनायक ने विश्वास के साथ आजाद मैदान के बाहर मीडिया को संबोधित किया था। उन्होंने कहा, ‘जैसे ही दंगा शुरू हुआ मैं पहुंचा और भीड़ को हटाकर स्थिति को नियंत्रण में करने का प्रयास करने लगा। मैंने वर्ष 1992-93 के दंगों में शहर में जो कुछ हुआ था वह देखा है और नहीं चाहता कि उसकी पुनरावृत्ति हो। भीड़ में कुछ ऐसे तत्व थे जिन्होंने समस्या को बढ़ाया। कम से कम एमआरए मार्ग के एक पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल है।Ó हेलमेट और पूरी वर्दी पहने पटनायक ने कहा कि जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई है।

मस्जिद बंदर रेलवे स्टेशन पर शनिवार को लोगों की बहुत भीड़ थी। सेंट्रल मुंबई की ओर जाने वाली जो भी ट्रेन मस्जिद बंदर पहुंचती थी उस पर लोगों की भीड़ इस तरह टूटती थी कि डिब्बों में खड़े होने की भी जगह नहीं थी। भीड़ ‘इंकलाब जिंदाबादÓ के नारे लगा रही थी। ट्रेनों में सवार लोग भयभीत थे। वे यह नहीं समझ पा रहे थे कि ट्रेनें मस्जिद बंदर से आगे क्यों नहीं बढ़ रही।

छत्रपति शिवाजी रेलवे स्टेशन के बाहर जिन रास्तों से लोग जाते हैं उनपर पत्थर पड़े थे। भीड़ ने पत्थरबाजी कर रेलवे की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया था। पुलिस किसी को भी स्टेशन पर रुकने नहीं दे रही थी। वहां मौजूद एक पुलिस इंस्पेक्टर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि भीड़ की मंशा की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती और जो कुछ हुआ वह नियंत्रण के बाहर था।

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