लंदन, प्रेट्र : वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि सूर्य अदृश्य मैग्नेटिक फील्ड वाली स्याह चादर से घिरा हुआ है जिसे डार्क मैटर (शून्य) कहते हैं। हालांकि इस बारे में सबसे पहले 1930 के दशक में एक स्विस अंतरिक्ष यात्री ने दावा किया था।
डेली मेल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार शोध के प्रमुख वैज्ञानिक सिल्विया गरबारी ने कहा कि वह 99 फीसद आश्वास्त हैं कि सूर्य के पास डार्क मैटर है। ज्यूरिख यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने एक नए सिद्धांत का प्रतिपादन किया। इसके लिए उन्होंने हमारी दूधिया आकाशगंगा में उद्दीपन पैदा करके घनत्व को मापने की विधि को परखा। फिर उसका वास्तविक आंकड़ों से मिलान किया। उन्होंने अपने शोध में दावा किया कि पिछले बीस सालों में अंतरिक्ष में स्याह रिक्त स्थान को मापने के पक्षपातपूर्ण तरीके के कारण ब्रह्मïांड में हमेशा डार्क मैटर की मात्रा को कमतर आंका गया।

गरबारी ने कहा कि सूर्य के चारों ओर डार्क मैटर का होना हमारी आकाशगंगा में डार्क मैटर की डिस्क के होने का पहला सबूत है। सूर्य जैसे करोड़ों सितारों को अपने में समेटी आकाशगंगा के बनने के गणितीय उद्दीपन पर शोध में भी ऐसी ही भविष्यवाणी की गई थी। अन्यथा इस शोध के नतीजों का मतलब ये भी है कि हमारी आकाशगंगा के चारों ओर बिखरे डार्क मैटर का चक्र कहीं से टूट गया है और वह सूर्य के चारों ओर बिखरा हुआ है।

वैज्ञानिकों ने नई तकनीक का उपयोग करते हुए सूर्य के करीब स्थित हजारों नन्हें तारों की सही स्थिति और उनकी गतिज ऊर्जा का पता लगाया है। इससे उन्हें हरेक स्थान या तारे के आसपास के डार्क मैटर का घनत्व पता चल जाता है। सह-शोधकर्ता जार्ज लेक ने कहा कि प्रयोगकर्ता भौतिकशास्त्री हर साल ऐसे ही कुछ कणों को पहचानने की उम्मीद कर रहे हैं जैसे कि जेनन और सीडीएमएस मौजूदा अभियान में अंतरिक्ष में मिले हैं।

इस सिद्धांत को दशकों पहले बताने वाले फ्रिट्ज जिकी का मानना था कि तमाम आकाशगंगाओं के गुच्छों के बीच रहस्यमयी डार्क मैटर भरा पड़ा है। यह शून्य या डार्क मैटर इन आकाशगंगाओं और इन में छिपे अनगिनत तारों को उनकी अपनी जगह पर बांधे रखता है या कह सकते हैं अपनी जगह से खिसकने नहीं देता।

इसी बीच, नीदरलैंड के जैन ओ आर्ट ने दावा किया है कि सूर्य के पास डार्क मैटर का घनत्व उम्मीद से दोगुना बताया है। इसीलिए इसके आसपास इतने तारे और गैस के विशाल बादल हैं|

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