लंदन: ब्रिटेन के पिछले पांच दशक के संगीत की सुरलहरियों, ब्रितानी संस्कृति की अनूठी छठा पेश करते रंगारंग कार्यक्रमों और आसमान को चकाचौंध कर देने वाली आतिशबाजी के बीच लंदन ओलंपिक का रविवार रात यहां खचाखच भरे ओलंपिक स्टेडियम में समापन हो गया। ओलंपिक का झंडा ब्राजील के शहर रियो को सौंपा गया जो अगले खेल महाकुंभ की मेजबानी करेगा|

शाही घराने के कई सदस्यों, कई जानी मानी हस्तियों, एथलीटों, खेल अधिकारियों और 80 हजार दर्शकों की मौजूदगी में तीन घंटे तक चले समापन समारोह में ब्रिटेन की तीन पीढिय़ों के संगीत ने दुनिया को सराबोर कर दिया। कार्यक्रम में भारत का भी योगदान रहा। भारतीय कलाकारों ने ढोल बजाकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया, जबकि भांगड़ा ने दर्शकों को भी थिरकने पर मजबूर कर दिया। मजेदार बात यह थी कि इस कर्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए दिग्गज कलाकारों को केवल एक पौंड दिया गया|

महारानी एलिजाबेथ के प्रतिनिधि बनकर आए प्रिंस हैरी और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आइओसी) के अध्यक्ष जैक रोगे के स्टेडियम में पधारने पर दर्शकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इसके बाद तो जैसे महफिल में जान आ गई। मैराथन दौड़ के विजेताओं को समापन समारोह के दौरान ही पदक दिए गए, जबकि 70000 वालंटियरों के प्रतिनिधि के रूप में छह वालंटियर को सम्मानित किया गया। इस दौरान विशालकाय स्क्रीनों पर लंदन ओलंपिक के अहम क्षणों और खिलाडिय़ों की भावुक भावभंगिमाओं का प्रदर्शन किया गया|

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