नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। प्रवीण ने 13 साल बाद इसका ऐलान किया। वह अब सिर्फ ओएनजीसी के लिए कंपनी क्रिकेट खेलेंगे और वो गेंदबाजी कोच बनना चाहते हैं। संन्यास के बाद उन्होंने कहा कि मुझे कोई पछतावा नहीं है। दिल से खेला, दिल से बॉलिंग की।

प्रवीण ने कहा कि उत्तर प्रदेश के ढेर सारे गेंदबाज हैं, जो पीछे इंतजार कर रहे हैं। मैं उनका करियर प्रभावित नहीं होने देना चाहता हूं। मैं खेलूंगा, तो एक जगह जाएगी। बाकी के खिलाड़ियों के भविष्य के बारे में भी सोचना चाहिए। मेरा समय (खेल का) पूरा हो चुका है और मैंने उसे स्वीकार लिया है। मैं बेहद खुश हूं और ईश्वर का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे यह मौका दिया।

यह पूछे जाने पर कि वह आगे क्या करेंगे? प्रवीण का जवाब था, ‘मैं गेंदबाजी का कोच बनना चाहता हूं। लोग जानते हैं कि मैं इस चीज का जानकार हूं। मुझे लगता है कि मैं इसमें दिल से काम करूंगा और बाकी नए युवाओं से अपना अनुभव साझा करूंगा।’

प्रवीण ने 2005-06 रणजी ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश के लिए खेलते हुए प्रभावित किया, जहां उन्होंने 41 विकेट लिए और 386 रन बनाए। उनके पास दोनों तरफ गेंद को स्विंग करने की क्षमता थी। घरेलू क्रिकेट में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद उन्होंने नवंबर 2007 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा।

उन्होंने देश के लिए 68 वनडे और छह टेस्ट मैच खेले। वनडे में उन्होंने 77 और टेस्ट में 27 विकेट लिए। आखिरी बार प्रवीण मार्च 30, 2012 को साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले थे।

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