प्रधानमंत्री मोदी के लखनऊ दौरे के ठीक पहले योगी सरकार ने वाराणसी फ्लाईओवर हादसे के मामले में जोरदार कार्रवाई की। शनिवार को क्राइम ब्रांच की टीम ने हादसे के लिए जिम्मेदार मानते हुए सेतु निगम के पूर्व मुख्य परियोजना प्रबंधक समेत आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। निर्माणाधीन फ्लाईओवर हादसे में पिता-पुत्र समेत 15 लोगों की मौत हुई थी और दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए थे। देर शाम सीजीएम कोर्ट में आरोपितों को पेश किया गया। अदालत ने आठों आरोपितों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। फ्लाईओवर हादसा बीते 15 मई को हुई था। 16 मई को वाराणसी रोडवेज चौकी प्रभारी की तहरीर पर सिगरा थाने में सेतु निगम के अज्ञात अफसरों के खिलाफ 304, 308, 427, 34 की धारा में केस दर्ज किया गया था। घटना की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी। तत्कालीन एसएसपी आरके भारद्वाज ने सीबीआरआई (सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) रुड़की के विशेषज्ञों से हादसे के कारण की तकनीकी जांच के लिखा था। जिसकी रिपोर्ट जुलाई के पहले सप्ताह में आ गई थी। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद संबंधित लोगों से बयान लिया था। इसके बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि इस मामले में बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

इन पर हुई कार्रवाई
1. गेंदालाल- पूर्व मुख्य परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम
2. हरिश्चन्द्र तिवारी- तत्कालीन मुख्य परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम
3. कुलजस राय सूदन- तत्कालीन परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम
4. राजेन्द्र सिंह- सहायक अभियंता सीविल
5. राम सत्या सिंह यादव- सहायक अभियंता यांत्रिक सुरक्षा
6. लाल चंद्र सिंह- अवर अभियंता सिविल
7. राजेश पाल सिंह- अवर अभियंता सिविल/सहयोगी सुरक्षा
8. साहब हुसैन- ठेकेदार

ऐसे बढी जांच
1- विवेचना के दौरान गवाहों के बयान दर्ज किया गया।
2-सेतु निगम द्वारा उपलब्ध कराये गये दस्तावेजों की जांच की गई।
3-सीबीआरआई के विशेषज्ञों से जांच कराई गई।
4- जांच के दौरान सामने आया कि सेतु निगम के अधिकारियों एवं ठेकेदार ने कार्य के दौरान इंजीनियरिंग मानको की अनदेखी और उसका अनुपालन नहीं किया गया।
5- सुरक्षा मानकों का भी ध्यान नहीं रखा गया। सम्भावित खतरे का आकलन नहीं किया गया। वहीं मिक्स मेथडलॉजी का रैण्डम प्रयोग किया गया
6-जांच के दौरान निर्माण कार्य के दौरान कई तकनीकी खामियां सामने आई।
7-सेतु निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया गया। 8- जो निर्देश दिए गए उनका भी पालन सुनिश्चित नहीं कराया गया।
9- अधिकारियों द्वारा संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण कार्य विशेषकर लोड ट्रांसफर के मामलों में कार्य के पहले या कार्य के बाद कोई निरीक्षण नहीं किया गया।
10-परियोजना से सम्बन्धित सेफ्टी ऑडिट भी कभी नहीं की गयी।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने सेतु निगम के सात अभियंताओं को निलम्बित कर दिया था। मामले की जांच अलग-अलग कमेटी कर रही थी। सीबीआरआई (सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) रुड़की की रिपोर्ट मिलने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.