श्रीनगर। घाटी में तनाव लगातार बढ रहा है। आतंकियों के भडकावे में आकर छात्र-छात्राएं सैनिकों पर पत्‍थर बरसा रहे हैं। कश्मीर के विरोध प्रदर्शन में अब कॉलेज और यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स शामिल हो रहे हैं। मंगलवार को सभी स्कूल-कॉलेज भी बंद हैं। इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है। तनाव को देखते हुए मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कैबिनेट की मीटिंग बुलाई है। सोमवार को घाटी के सभीB 10 जिलों में स्टूडेंट्स सड़क पर उतर आए। ये शनिवार को पुलवामा डिग्री कॉलेज में हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। स्टूडेंट्स ने पत्थरबाजी भी की। इसमें एक थाना इंचार्ज, 24 पुलिसकर्मी और करीब 36 स्टूडेंट्स घायल हुए। पुलवामा कार्रवाई के विरोध में श्रीनगर में एसपी कॉलेज और विमिन कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने आजादी और भारत विरोधी नारे गए और मुख्य एम ए रोड को बंद कर दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले और पानी की बौछार करनी पड़ी। न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक, सत्तारूढ़ पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार और जम्मू-कश्मीर के विपक्ष ने छात्रों के खिलाफ फोर्स की कार्रवाई की निंदा की है।
उमर फारुख ने राष्‍ट्रपति शासन लगाने की मांग की
विपक्ष ने कश्‍मीर में बिगडते हालात के लिए राज्‍य सरकार को दोषी ठहराया है। उमर फारुख ने राष्‍ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। वहीं स्टूडेंट्स ने घाटी में अपनी क्लासेस का बायकॉट किया। शनिवार को पुलवामा में सिक्युरिटी फोर्सेस और स्टूडेंट्स के बीच झड़प में 20 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए थे। पीडीपी स्पोक्सपर्सन के मुताबिक, पार्टी ने फोर्स के कॉलेज में जाने और स्टूडेंट्स-स्टाफ पर एक्शन लेने की जांच कराने के आदेश दिए हैं। साथ ही शांति भंग करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। पीडीपी ने ये भी कहा कि फोर्स के एक्शन से स्टूडेंट्स का भड़क जाना सामान्य बात है। लेकिन स्टूडेंट्स से अपील भी की कि वे अपने इंस्टीट्यूट्स में शांति बनाए रखें। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के चीफ जीए मीर के मुताबिक, सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर लोगों पर जुल्म ढा रही है। मौजूदा सरकार टॉर्चर की हर हद पार कर चुकी है।
पत्थरबाजों से निपटने के लिए अब प्लास्टिक बुलेट का इस्तेमाल
कश्मीर घाटी में पत्थरबाजों से निपटने के लिए अब प्लास्टिक बुलेट का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, होम मिनिस्ट्री ने सिक्युरिटी फोर्सेस को पैलेट गन का इस्तेमाल लास्ट ऑप्शन के तौर पर करने का ऑर्डर दिया है। लॉ इनफोर्समेंट एजेंसीज के ऑफिशियल सोर्स के मुताबिक, घाटी में हजारों प्लास्टिक बुलेट कश्मीर वैली में भेज दी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्लास्टिक बुलेट बॉडी में नहीं घुसती। बता दें कि पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन से होने वाले नुकसान को “जीवन और मौत” का मुद्दा बताया था। बताते चलें कि सेना और युवकों के पथराव के बीच आतंकी मौके से भाग निकलने में कामयाब हो जाते हैं।

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