मध्यप्रदेश के वित्तमंत्री जयंत मलैया ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए बजट पेश किया। इस बजट में शहरी गरीबों के लिये पांच रुपये में भोजन, विधवा महिलाओं के लिये पेंशन और प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग का लाभ देने वाले कई लोक लुभावन वादे शामिल हैं। वित्त मंत्री ने प्रदेश विधानसभा में अपना लगातार पांचवा बजट पेश किया। उन्होंने वर्ष 2017-18 के लिये पेश किये बजट में प्रदेश के कर्मचारियों को जुलाई 2017 से सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन देने की घोषणा की है, हालांकि इन वेतनमानों को जनवरी 2016 से लागू किया गया है।

इसके अलावा प्रदेश के चार बड़े शहरों में ‘दीनदयाल रसोई योजना’ लागू की जायेगी। योजना के तहत शहरी गरीबों को पांच रुपये में भोजन की थाली मिलेगी। इसके लिये अधोसंरचना निर्माण हेतु बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मलैया ने कहा, “प्रदेश में वर्ष 2004-05 से राजस्व आधिक्य की स्थिति है जो कि वर्ष 2017-18 में भी अनुमानित है। वर्ष 2017-18 के लिये राजकोषीय घाटे का अनुमान 25,688.97 करोड़ रुपये का है। यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 3.5 प्रतिशत अनुमानित है।”

उन्होंने कहा, “वर्ष 2017-18 के लिये कुल विनियोग राशि 1,85,564.27 करोड़ रुपये है और शुद्ध व्यय 1,69,954.46 करोड़ रुपये अनुमानित है। इस प्रकार वर्ष 2017-18 में 4596.40 करोड़ रुपये का राजस्व अधिक्य अनुमानित है।” प्रदेश सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पेंशन की राशि 150 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये की है। समाज में विधवाओं की कमजोर स्थिति देखते हुये शासन ने सेवारत और पेंशन पाने वालों को छोड़कर सभी विधवाओं को पेंशन देने का निर्णय लिया है। इसके लिये बजट में 1,501 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि बजट में इन्दौर और भोपाल हवाई अड्डों में विमान ईंधन पर वैट की दर 4 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इससे इन स्थानों से हवाई यात्रा मंहगी हो जायेगी। ग्वालियर, जबलपुर और खजुराहो हवाई अड्डे पर एटीएफ की वैट दर पहले की तरह ही 4 प्रतिशत रखी गई है जबकि क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिये प्रदेश के दूसरे हवाई अड्डों पर एटीएफ पर वैट की दर 4 प्रतिशत से कम करते हुए एक प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इससे प्रदेश के अन्य स्थानों पर हवाई सेवा को बढ़ावा मिल सकेगा।

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बजट के बाद बताया कि दीनदयाल रसोई योजना के तहत शुरू में प्रदेश के चार बड़े शहरों के गरीब लोगों को 5 रुपये में भोजन उपलब्ध कराने की योजना है। इस योजना को कॉर्पोरेट सामाजिक जवाबदेही कोष से संचालित किया जायेगा। बाद में योजना का विस्तार पूरे प्रदेश में किया जायेगा। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिये वित्तमंत्री ने सबसे अधिक राशि का 19,872.89 करोड़ रुपये का आवंटन स्कूली शिक्षा के लिये किया है जबकि वर्ष 2016-17 में इसके लिये 18,094.04 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। शिक्षा के अलावा बजट में उर्जा क्षेत्र में 16,801.62 करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास हेतु 14,387.50 करोड़ रुपये, शहरी विकास के लिये 11,489.03 करोड़ रुपये और लोक निर्माण विभाग हेतु 8576.17 करोड़ रुपये का आवंटन करने का प्रस्ताव है।

संपत्ति के पंजीयन में दुरुपयोग और धोखाधड़ी की रोकथाम के लिये प्रदेश सरकार ने ई-पंजीयन हेतु आधार नंबर अनिवार्य करने का प्रस्ताव किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों गंगासागर, कामाख्या देवी, गिरनार जी, पटना साहिब तथा मध्यप्रदेश के तीर्थ स्थानों उज्जैन, मैहर, श्रीराम राजा मंदिर, ओरछा, चित्रकूट, ओंकारेश्वर तथा महेश्वर को भी जोड़ा जायेगा। कैलाश मानसरोवर यात्रा हेतु अनुदान राशि अधिकतम 30,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रपये की गयी है।

इसके साथ ही बजट में नर्मदा नदी के किनारे पौधारोपण और कृषि वानिकी के लिये कुल 102 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मलैया ने बताया कि शासन द्वारा प्रदेश में वर्ष 2011 से कोई भी नवीन मदिरा दुकान नहीं खोली गयी है। नर्मदा नदी की पवित्रता बनाये रखने के लिये नर्मदा नदी के पांच किलोमीटर की सीमा में आने वाली 66 मदिरा की दुकानें एक अप्रैल 2017 से बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसी प्रकार राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्यमार्ग पर स्थापित 1427 मदिरा दुकानों को मार्ग से 500 मीटर की दूरी पर स्थापित किया जायेगा। नशा मुक्ति के लिये सेमिनार आयोजित किये जायेगें। उन्होंने बताया कि राज्य डाटा सेंटर के विस्तार के लिये 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना आगामी वित्तीय वर्ष से शुरू की जायेगी और इसके लिये। इस कोष के तहत 500 करोड़ का प्रावधान इस बजट में रखा गया है। इस योजना का लाभ 12वीं की परीक्षा में कम से कम 85 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्र उठा पाएंगे।

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