महाशिवरात्रि के मौके पर नरेंद्र मोदी ने कोयंबटूर में 112 फीट की शिव प्रतिमा का अनावरण किया था। मोदी ने कोयंबटूर में पूजा के दौरान भगवान शिव की तस्वीर वाला पीकॉक ब्लू कलर का स्टोल पहना था। इसी शाम शिल्पी तिवारी नाम की एक महिला ने उन्हें ट्वीट करके कहा- “मुझे आपका शिव स्टोल चाहिए।” शिल्पी के ट्वीट करने के 21 घंटे बाद ही मोदी ने अपना ये स्टोल उन्हें भेज दिया। लोगों ने इसकी तारीफ भी की। बता दें कि सोशल मीडिया पर सुषमा स्वराज और सुरेश प्रभु लोगों के ट्वीट का तुरंत जवाब देते हैं।

शिल्पी ने मोदी को ट्वीट किया था, मुझे आपका स्टोल चाहिए। बड़ी बात ये रही कि अगले दिन शिल्पी को मोदी की तरफ से स्टोल मिल गया। इसके साथ ही मोदी का साइन किया हुआ उनके ट्वीट का एक प्रिंटआउट भी मिला। मोदी से मिलने वाले गिफ्ट की खुशी को शिल्पी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया।

उन्होंने ट्वीट किया, आधुनिक भारत के कर्मयोगी से आशीर्वाद पाकर बेहद खुश हूं। पीएम मोदी हर रोज मीलों चलते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने मुझे अपना आशीर्वाद भेजा है, क्योंकि एक दिन पहले मैंने उन्हें ट्वीट कर उनका स्टोल मांगा था। क्या मैं सपना तो नहीं देख रही। शिल्पी ने ये भी लिखा, स्टोल के साथ उनका साइन किया एक पेपर भी आया। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि पीएम आपकी बात सुनते हैं और वक्त निकालकर उसका व्यक्तिगत रूप से जवाब देते हैं। मैं आश्चर्यचकित हूं। समझ ही नहीं आ रहा कि इसका जवाब कैसे दूं। मतलब, कमाल ही कर दिया।”

मोदी ने शुक्रवार को महाशिवरात्रि के मौके पर यहां के ईशा योग केंद्र में शिव की 112 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया था। प्रतिमा को ईशा फाउंडेशन के फाउंडर सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने डिजाइन किया है। मोदी ने वासुदेव के साथ मंदिर की परिक्रमा की। इस जगह को ‘ध्यानलिंगा’ कहा जाता है। प्रतिमा को पत्थर की जगह स्टील के टुकड़े जोड़कर देसी तकनीक से तैयार किया गया है। भगवान शिव को आदियोगी या दुनिया का पहला योग गुरु भी कहा जाता है।

मोदी ने कहा, वासुदेव जी और बाकी लोगों का शुक्रिया जो मुझे यहां बुलाया। कई देव हैं, लेकिन शिव को महादेव कहा जाता है। कई मंत्र हैं, लेकन शिव के मंत्र को महामृत्युंजय मंत्र कहा जाता है। कई रात्रि हैं, लेकिन शिव की इस रात को महाशिवरात्रि कहा जाता है। मैं सोमनाथ की धरती से हूं। लेकिन राजनीति ने मुझे सोमनाथ से विश्वनाथ यानी काशी तक पहुंचाया। मैं जहां जाता हूं, वहां शिव मेरे साथ होते हैं। सदियों से शिव के अनगिनत भक्त हैं। उनकी अलग भाषाएं हैं, लेकिन उनकी आस्था सिर्फ शि‌व हैं।

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