देश का सबसे अहम रणक्षेत्र माने जाने वाले उत्तर प्रदेश में पूरी तरह कांटे की टक्कर शुरू हो गई है। यूपी चुनाव से पहले इंडिया टुडे ग्रुप के लिए एक्सिस-माई इंडिया की ओर से किए गए आखिरी ओपिनियन पोल के मुताबिक पिछले ओपिनियन पोल की तुलना में बीजेपी के खाते में 25 सीटों की कमी आई है। पिछला ओपिनियन पोल दिसंबर में और ताजा ओपिनियन पोल जनवरी में किया गया।

एक्सिस-माई इंडिया के अनुमान के मुताबिक तत्काल चुनाव होने पर बीजेपी को यूपी में 180 से 191 सीट मिलने जा रही हैं। लेकिन एसपी-कांग्रेस गठबंधन भी ज्यादा पीछे नहीं है। इस गठबंधन को 168-178 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है। गठबंधन से सबसे ज्यादा नुकसान बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) को होता दिख रहा है। बीएसपी को दिसंबर से जनवरी के बीच 40 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है। पिछले एक महीने में सभी अहम राजनीतिक ताकतों के वोट शेयर के हिस्से में भी बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। बीएसपी एक महीने में अपने वोट शेयर का पांचवां हिस्सा खोते दिखी। इस पार्टी का वोट शेयर 26% से घटकर 20.1% पर आ गया।

ताजा ओपिनियन पोल के आंकड़े दिखाते हैं कि कांग्रेस के हाथ का साथ समाजवादी पार्टी की साइकिल को मिलने से समाजवादी पार्टी के वोटों में 7% वोटों का इजाफा हुआ है। ओपिनियन पोल के मुताबिक एसपी के पास 26 फीसदी हैं। लेकिन कांग्रेस के साथ गठबंधन होने के बाद इस गठबंधन को 33.2% वोट मिलने का अनुमान है। हालांकि इस नए गठबंधन से बीजेपी का अपना वोट शेयर कमोवेश अप्रभावित है। असलियत ये है कि बीजेपी का अपना वोट शेयर जो दिसंबर में 33% दिख रहा था वो जनवरी में बढ़ कर 34.8% हो गया।

यूपी में चुनाव अब मोटे तौर पर बीजेपी और एसपी-कांग्रेस गठबंधन के बीच दो घोड़ों की दौड़ सरीखा हो गया है। दिसंबर में बीजेपी को निकटतम प्रतिद्वंद्वी एसपी पर 100 सीट की बढ़त हासिल थी। लेकिन अब अखिलेश-राहुल के साथ ने यूपी के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल डाला है। हालांकि प्रदेश में कांग्रेस हाशिए पर पहुंची ताकत है लेकिन इसने एक महीने के अंतराल में ही तथाकथित धर्मनिरपेक्ष गठबंधन के लिए 76 सीटों का इजाफा करने में मदद की है।

एक्सिस के तीनों पोल के दौरान जातिगत आंकड़ों के अध्ययन से दिलचस्प तथ्य सामने आए कि किस तरह यूपी का चुनावी गणित बदलता रहा है। बीते एक महीने में एसपी-कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में यादव और मुस्लिमों का खासा जमावड़ा हुआ है। दिसंबर में 72% यादवों का कहना था कि वे एसपी को वोट देंगे। जनवरी में ये आकंड़ा 10% बढ़कर 82% हो गया। इसकी एक बड़ी वजह ये है कि दिसंबर में जितने यादव बीजेपी के पक्ष में वोट देने की बात कर रहे थे, उनमें से भी आधे एसपी की तरफ मुड़ गए।

दिसंबर में मुस्लिमों में से 71% ने कहा था कि वे एसपी को वोट देंगे। जनवरी में ये आंकड़ा बढ़कर 74% हो गया। एसपी को कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से सवर्ण वोटों का 19% हिस्सा अपने साथ लाने में मदद मिली है। दिसंबर में अकेले एसपी को सवर्ण वोटरों में सिर्फ 9% हिस्सा ही मिल रहा था। इस बीच, बीते एक महीने में बीएसपी सभी जाति वर्गों में कुछ ना कुछ समर्थन खोती नजर आई।
यूपी ओपिनियन पोल के आंकड़ों को अगर क्षेत्रवार बांटा जाए तो बीजेपी को पूर्वी यूपी में साफ बढ़त दिख रही है। इस क्षेत्र में कुल 167 सीट हैं। एक्सिस के अनुमान के मुताबिक पूर्वी यूपी में बीजेपी को 89 सीटें मिलने जा रही हैं। वहीं एसपी-कांग्रेस गठबंधन के खाते में 55 सीटें जा सकती हैं। बीएसपी को 22 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है। अगर पश्चिमी यूपी की कुल 136 सीटों की बात की जाए तो यहां मुस्लिमों के बड़ी तादाद में एकजुट होने की वजह से एसपी-कांग्रेस के खाते में 68 सीटें जा सकती हैं। पश्चिमी यूपी में बीजेपी को 53 सीट मिल सकती हैं। वहीं बीएसपी सिर्फ 13 सीटों पर ही जीत हासिल करती नजर आ रही है।

मध्य यूपी को पारंपरिक तौर पर समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है। यहां की कुल 81 सीटों में से एसपी-कांग्रेस गठबंधन को 47, बीजेपी को 31 और बीएसपी को सिर्फ 3 सीटें मिलने का अनुमान है। बुंदेलखंड यूपी का सबसे छोटा क्षेत्र है। यहां बीजेपी को 12, एसपी-कांग्रेस गठबंधन को 4 और बीएसपी को 3 सीट मिल सकती हैं।

ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि जब हालात एसपी-कांग्रेस गठबंधन के लिए अनुकूल होते जा रहे हैं तो क्या अखिलेश और राहुल मतगणना वाले दिन नरेंद्र मोदी और अमित शाह को पछाड़ने में कामयाब रहेंगे?

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