जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के ओपिनियन पोल भी तेजी से आ रहे हैं। एक सर्वे की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन को 187 से 197 सीटें और 35 फीसदी वोट शेयर के साथ पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना है।

एबीपी न्यूज-सीएसडीएस-लोकनीति की ओर से जनवरी में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि सत्तारूढ़ सपा में पारिवारिक विवाद के बावजूद अखिलेश यादव 26 फीसदी समर्थन के साथ अगले मुख्यमंत्री का सबसे पसंदीदा चेहरा बने हुए हैं। इस बार उत्तर प्रदेश चुनावों में समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के अलावा प्रदेश की कानून व्यवस्था, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और विकास का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है। जहां एक ओर बीजेपी और बसपा प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश सरकार को घेर रही हैं, वहीँ विपक्ष नोटबंदी के फैसले को भी चुनावी मुद्दा बना रहा है।

हालांकि नोटबंदी का ज्यादा असर देखने को नहीं मिल रहा है। और इस सर्वे के मुताबिक भाजपा को 118 से 128 सीटें मिलने की बात कही गई है। केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद जिस तरह से बीजेपी को दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, वैसे में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। मुख्यमंत्री चेहरे को सामने न लाकर एक बार फिर बीजेपी ने पीएम मोदी के चेहरे पर दांव खेला है। इसका कितना फायदा उसे इन चुनावों में मिलेगा वह तो नतीजे ही बताएंगे।

वहीं, चुनाव की दौड़ में तीसरी सबसे प्रमुख पार्टी बसपा है और उसे 76 से 86 सीटें मिलने की बात कही गई है। सर्वेक्षण में सामने आया है कि बुंदेलखंड में पार्टी अच्छे नतीजे हासिल कर सकती है।
यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। 2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 224 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सात चरणों में 11 फरवरी से शुरू होकर आठ मार्च तक चलेगा।

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