अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अमेरीका में मुस्लिम देशों के लोगों पर अस्थायी पाबंदी लगाने के आदेश पर वहां की अदालत ने आंशिक रोक लगा दी है। अमेरिका में फंसे शरणार्थियों के लिए यह फैसला एक बड़ी राहत है। वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले की चौतरफा आलोचना हो रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस फैसले का विरोध तो हो ही रहा है, स्थानीय लोग भी इसके खिलाफ सड़कों पर उतरने लगे हैं। पिछले हफ्ते ही अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले ट्रंप के इस फैसले के विरोध में पूरे अमेरिका में प्रदर्शनों का दौर शुरू हो चुका है।

अदालत की आंशिक रोक
शनिवार शाम को एक फेडरल जज ने राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर आंशिक रोक लगाते हुए आदेश दिया कि अमेरिका के एयरपोर्ट पर फंसे शरणार्थियों और दूसरे लोगों को स्वदेश न भेजा जाए। हालांकि जज ने ट्रंप के आदेश की संवैधानिकता पर कोई फैसला जारी नहीं किया है। शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने जैसे ही 7 मुस्लिम देशों पर बैन लगाने के आदेश पर दस्तखत किया, अमेरिकी एयरपोर्टों पर ‘प्रतिबंधित’ देशों से आने वाले लोगों को हिरासत में लिया जाने लगा। वाइट हाउस के इस आदेश के खिलाफ कुछ वकील न्यू यॉर्क सिटी की अदालत में गए जहां मामले की तत्काल सुनवाई हुई, जिसके बाद जज ने यह फैसला सुनाया।

ब्रुकलिन के फेडरल डिस्ट्रिक्ट जज एन एम. डोनली ने अपने आदेश में कहा कि यात्रियों को उनके घर भेजने से उन्हें ‘अपूर्णीय क्षति’ पहुंचेगी। सुनवाई के दौरान अदालत के बाहर लोगों की भीड़ इकट्ठी थी। जैसे ही लोगों को फैसले के बारे में पता चला उन्होंने नारेबाजी कर फैसले पर खुशी का इजहार किया।

चौतरफा हो रही बैन की निंदा
7 मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका आने-जाने पर अस्थायी रोक के फैसले की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना हो रही है। अमेरिका के करीबी सहयोगी यूरोपीय यूनियन ने ट्रंप सरकार के इस फैसले की निंदा की है। वहीं, कनाडा ने शरणार्थियों को आश्रय देने का ऐलान किया है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्वीट किया, ‘दमन, आतंकवाद और युद्ध की वजह से पलायन करने वालों का कनाडावासी बिना किसी भेदभाव के स्वागत करेंगे, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। विविधता हमारी ताकत है।’

सोशल मीडिया ने भी की आलोचना
वहीं, गूगल के भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचाई और फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने भी ट्रंप सरकार के फैसले की आलोचना की है। पिचाई ने इसे ‘दुखद’ निर्णय बताते हुए कहा कि इससे गूगल के कम से कम 187 कर्मचारियों पर असर पड़ेगा। माइक्रोसॉफ्ट के भारतीय-अमेरिकी सीईओ सत्य नडेला ने लिंक्डइन पर एक नोट पोस्ट करते हुये कहा, ‘कंपनी इस महत्वपूर्ण विषय पर समर्थन करती रहेगी।’ उन्होंने कहा कि एक प्रवासी और कपंनी का सीईओ होने के नाते उनके पास दोनों अनुभव हैं और उन्होंने देश, दुनिया और उनकी कपंनी पर आव्रजन का सकारात्मक प्रभाव देखा है।

जकरबर्ग ने भी कुछ मुस्लिम बहुल देशों के प्रवासियों और शरणार्थियों पर रोक लगाने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका प्रवासियों का देश है और उसे इस पर गर्व करना चाहिये। जकरबर्ग ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, ‘आपकी तरह, मैं भी राष्ट्रपति ट्रंप के हाल ही के शासकीय आदेश से पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हूं।’ ट्विटर ने भी ट्वीट कर प्रवासियों के प्रति अपना समर्थन जताया है। ट्विटर ने अपने आफिशल ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘ट्विटर सभी धर्मों के प्रवासियों से बना है। हम उनके साथ हमेशा खड़े हैं।’

दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका की इस कार्रवाई के जवाब में अमेरिकी नागरिकों के ईरान में प्रवेश पर बैन लगाने का फैसला किया है। ईरान विदेश मंत्रालय ने शनिवार को इस फैसले की जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के फैसले को ‘अपमानजनक’ बताया।

गौरतलब हो की अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को 7 मुस्लिम देशों से आने वाले नागिरकों के लिए कड़े नियम वाले नए कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए। ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ये वादे किए थे। आदेश पर हस्ताक्षर के बाद ट्रंप ने कहा कि वह ‘कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादियों’ से अमेरिका को सुरक्षित कर रहे हैं। इस आदेश के तहत 7 मुस्लिम देशों ईरान, इराक, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन के नागिरकों पर 4 महीने के लिए वीजा पाबंदियां लगा दी गई हैं।

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