जिस ‘पद्मावती’ को लेकर इन दिनों जमकर बवाल मचा हुआ है, असल में क्या है उनकी कहानी क्या आप जानते हैं? नहीं, तो हम बता रहे हैं कि दरअसल पद्मावती कोई चरित्र ही नहीं है। जी हां, पद्मावती या पद्ममिनी मलिक मोहम्मद जायसी के महाकाव्य ‘पद्मावत’ की महज एक कल्पना मात्र है। यह कहना है जेएनयू से रिटायर हो चुके हिस्ट्री प्रोफेसर और इतिहासकार हरबंस मुखिया का।

हालांकि इसकी प्रामाणिकता को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं। कई इतिहासकारों का मानना है कि पद्मावती नाम का कोई किरदार इतिहास में नहीं था। उनके मुताबिक पद्मावती केवल एक साहित्यिक किरदार थी और वह ऐतिहासिक किरदार नहीं थी। ये इतिहासकार कहते हैं कि अलाउद्दीन के जमाने में इस तरह के किसी किरदार का जिक्र नहीं मिलता। वे मानते हैं कि चारण परंपरा, लोक कथाओं, वाचक परंपरा और जनश्रुति के चलते यह किरदार सदियों से जीवित है।

आखिर रानी पद्मावती कौन थी?
रानी पद्मावती एक ऐतिहासिक किरदार हैं या केवल साहित्यिक किरदार हैं? अतीत के आईने में यदि झांक कर देखा जाए तो माना जाता है कि 15-16वीं सदी में यह किरदार सबसे पहले चर्चित हुआ। दरअसल मलिक मुहम्‍मद जायसी ने 1540 ईस्‍वी के आसपास महाकाव्‍य ‘पद्मावत’ लिखा था। उस कृति के मुताबिक रानी पद्मावती, चित्‍तौड़ के राजा रावल रतन सिंह की पत्‍नी थीं। प्रोफेसर हरबंस मुखिया ने बताया कि दिल्ली सल्तनत के खिलजी वंश के दूसरे शासक अलाउद्दीन खिलजी का काल 1296-1316 का है और जायसी की ‘पद्मावत’ 1540 में, यानि 250 साल बाद।

उनका कहना है कि मलिक मोहम्मद जायसी हिन्दी साहित्य के भक्ति काल की निर्गुण प्रेमाश्रयी धारा के कवि थे, एक सूफी संत थे। वे कोई इतिहासकार नहीं थे। जायसी की ‘पद्मावत’ भी एक सूफी अवधारणा पर आधारित है। सूफी अवधारणा के मुताबिक, अल्लाह एक महबूब है और इंसान उसका एक आशिक है। इस अवधारणा में महबूब और आशिक मिलकर फना हो जाते हैं। ये एक तरह का सूफी रोमांस ही है। ‘पद्मावत’ का भी यही आधार है। पद्मावती कोई वास्तविक चरित्र नहीं है, ये जायसी की एक कल्पना है, जिसे उन्होंने सूफी रोमांस में ढाला था। इतिहास में पद्मावती का कोई जिक्र नहीं है।

उस कहानी में बताया गया है कि रानी पद्मावती अप्रतिम सौंदर्य की मलिका थीं। दिल्‍ली का शासक अलाउद्दीन खिलजी उन पर आसक्‍त था। पद्मावती को पाने के लिए उसने 1303 में चित्‍तौड़ पर हमला कर दिया और राजपूतों की उस युद्ध में हार हुई। खिलजी जब महल पहुंचा तो उसने देखा कि रानी पद्मावती समेत राजपूत महिलाओं ने जौहर कर लिया था। जौहर मध्‍ययुग में एक ऐसी प्रथा थी जब राजपूत राजाओं के युद्ध में मारे जाने के बाद उनकी रानियां दुश्‍मन के चंगुल से बचने के लिए सामूहिक रूप से आत्‍मदाह कर लेती थीं।

गौरतलब हो कि फिल्मकार संजय लीला भंसाली ‘पद्मावती’ नाम से एक फिल्म बना रहे हैं, जिसे लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है। शुक्रवार को राजस्थान के जयपुर में फिल्म की शूटिंग के दौरान करणी सेना ने फिल्म के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट की गई और सेट को भी तोड़ दिया गया। इस दल के लोगों ने फिल्म की कहानी से जुड़े एक तथ्य पर आपत्ति जताते हुए ये कदम उठाने का दावा किया है।

वहीं, करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह ने आरोप लगाया है कि ये फिल्म गलत तथ्यों पर बनाई जा रही है और यही कारण है कि हम इसका विरोध कर रहे हैं। महिपाल सिंह का कहना है कि रानी पद्मावती के साथ अलाउद्दीन खिलजी का जो रोमांस दिखाने की कोशिश, कथित तौर पर फिल्म में की जा रही है, वो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि पद्मावती वो महिला थीं जिन्होंने अपनी आन-बान-शान के लिए जौहर किया था।

जायसी की ‘पद्मावत’ में है ‘पद्मावती’
इस रचना के मुताबिक, रतनसेन ऐतिहासिक व्यक्ति है, वह चित्तौड़ का राजा है, पद्मावती उसकी वह रानी है जिसके सौंदर्य की प्रशंसा सुनकर तत्कालीन सुल्तान अलाउद्दीन उसे प्राप्त करने के लिए चित्तौड़ पर आक्रमण करता है और युद्ध में विजय प्राप्त करता है, लेकिन पद्मावती के मृत्यु के कारण उसे नहीं प्राप्त कर पाता है।

क्या है फिल्म की कहानी
‘पद्मावती’ राजस्थानी पृष्ठभूमि की कहानी है। फिल्म में शाहिद कपूर पद्मावती के पति और राजपूत शासक राजा रतन सिंह की भूमिका में हैं। इसके अलावा इस फिल्म में रणवीर सिंह सल्तनत काल में दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिलजी की भूमिका निभा रहे हैं, जिसे रानी पद्मावती से प्रेम हो गया था। फिल्म में पद्मावती की भूमिका दीपिका पादुकोण निभा रही हैं।

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