समाजवादी पार्टी ने घोषणापत्र का ऐलान कर दिया है। इस घोषणापत्र में यूपी की जनता के सामने तमाम मुफ्त सौगातें देने का वादा किया गया है। साथ ही विकास के रूप में सड़कों और मेट्रो के साथ स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया गया है। सपा के घोषणापत्र में तमिलनाडु की एक अहम योजना अम्मा किचेन की झलक दिख रही है, अखिलेश ने ऐलान किया है कि सपा सरकार बनती है तो मजदूरों, गरीबों को रियायती दर पर मिड डे मील दिया जाएगा। इसके अलावा सबसे बड़ा ऐलान करते हुए अखिलेश ने कहा​ कि प्रदेश के एक करोड़ गरीब लोगों को एक हजार रुपए महीने की पेंशन दी जाएगी।

ये है सपा का घोषणापत्र
* सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि 2012 में घोषणापत्र से आगे बढ़कर संतुलित विकास का मॉडल लागू किया।
* 2017 के घोषणा पत्र में प्रतिबद्धता लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता के साथ विकास का संतुलन रखना हमारी प्राथमिकता है।
* पूर्वांचल ​एक्सप्रेस वे, 1090 वुमेन पावरलाइन, समाजवादी पेंशन, लोहिया आवास आदि को और अधिक मजबूती से चलाया जाएगा।
* सभी नेताओं से अपने विधानसभा क्षेत्र का रोडमैप बनाने को कहा, जिसे आगे पांच साल में हम लागू करेंगे।
* समाजवादी किसान कोष, जिसमें किसानों को बीज वितरण, खाद आदि की सुविधा दी जाएगी।
* सरकार और लोगों से सीधे संपर्क के लिए लैपटॉप के साथ ही स्मार्टफोन समाजवादी लोग देंगे।
* आने वाले समय में एक करोड़ लोगों को 1000 रुपए की मासिक पेंशन देंगे।
* गरीब महिलाओं को प्रेशर कुकर, अल्पसंख्यक वर्ग के कौशल विकास की योजनाएं होंगी लागू
* कामकाजी महिलाओं के​ लिए हॉस्टल
* महिलाओं को रोडवेज बस में छूट
* मजदूरों को रियायती दर पर मिड डे मील
* डेढ़ लाख रुपए की सालाना आय के लोगों का इलाज मुफ्त
* आगरा, कानपुर और वाराणसी में मेट्रो
* ट्रैफिक व्यवस्था और दुरुस्त की जाएगी
* सभी गांव और मजरों को बिजली देंगे
* गांवों में किसान कोष योजना से ​मुफ्त बिजली दी लाएगी
* जानवरों के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की जाएगी
* फोर लेन से सभी जिला मुख्यालयों को जोड़ा जाएगा
* तहसील स्तर पर फैमिली बाजार की व्यवस्था दी जाएगी
* गरीब बच्चो के लिए एक लीटर घी और एक किलो मिल्क पाउडर देंगे
* कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि 2017 के चुनाव के लिए घोषणापत्र हम * आपके बीच रख रहे हैं। 22 तारीख को जनेश्वर मिश्र की याद के साथ घोषणापत्र को जनता के बीच रख रहे हैं।

अखिलेश ने कहा कि हम सब आने वाले समय में समाजवादी सरकार बनाना चाहते हैं। मैंने कहा था कि पांच महीने काम कर लो, तो आपको पांच साल की सरकार मिलेगी। आपके पास कहने को बड़ी चीजें हैं, जिन्हें हमने जमीन पर उतारी हैं। जो बात हमारे पिछले घोषणापत्र में नहीं थी, उसे भी हमने पूरा किया है। जितनी रफ्तार बढ़ेगी, उतनी हमारी अर्थव्यवस्था बेहतर होगी, उतना उत्तर प्रदेश तरक्की करेगा। सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने का आर्शीवाद नेताजी से मिला। पांच साल मेरी लगातार कोशिश रही कि समाजवादी सिद्धांत से हटें नहीं।

अखिलेश ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘लोग समीकरण बना रहे हैं, तमाम दल हैं, जिनके पास बताने को कुछ नहीं है। जिन्होंने नारा दिया अच्छे दिन का, जिन्होंने कहा सबका साथ, सबका विकास करेंगे, कहते थे, तीन साल से उनके अच्छे दिन जनता ढूंढ रही है। विकास के बहाने कभी झाड़ू पकड़ा दी, कभी योगा करा दिया। हम समाजवादी जिले का काम तक बता सकते हैं।’ शायद ही किसी सरकार ने बच्चों के लिए काम किया होगा, जितना सपा सरकार ने किया है। मैनपुरी के पास प्राइमरी स्कूल में बच्चों को पढ़ते देखा। गांव के सबसे गरीब लोगों के 9 बच्चे मुझे मिले। मैंने पूछा गांव में मेला चल रहा है, आपको पता है। सभी बच्चों को पता था लेकिन वो मेला नहीं गए। मैंने उन बच्चों को अपनी जेब से 500-500 रुपए दिए। अब उस स्कूल में बच्चों की संख्या काफी बढ़ गई है और वे मुख्यमंत्री का इंतजार कर रहे हैं।

सीएम अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी दफ्तर पर उनके साथ पत्नी डिंपल यादव, आजम खान और किरणमय नंदा भी थे। लेकिन घोषणापत्र के ऐलान के दौरान सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव नहीं पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने मुलायम से फोन पर आने का आग्रह किया, करीब 20 मिनट से मुलायम सिंह को कार्यक्रम में पहुंचने के लिए मान-मनौव्वल करने के बाद भी मुलायम नहीं आए। और न ही नेता शिवपाल सिंह यादव उपस्थित हुए। दिलचस्प बात ये है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी दफ्तर पहुंचे हैं।

उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच सात चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के अखिलेश धड़े के बीच गठबंधन अगर होता भी है तो इसके बावजूद भी बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद जिस तरह से बीजेपी को दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, वैसे में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। मुख्यमंत्री चेहरे को सामने न लाकर एक बार फिर बीजेपी ने पीएम मोदी के चेहरे पर दांव खेला है।

इस बार उत्तर प्रदेश चुनावों में समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के अलावा प्रदेश की कानून व्यवस्था, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और विकास का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है। जहां एक ओर बीजेपी और बसपा प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश सरकार को घेर रही हैं, वहीँ विपक्ष नोटबंदी के फैसले को भी चुनावी मुद्दा बना रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.