तमिलनाडु के प्रमुख खेलों में से एक सांडों की लड़ाई के खेल जलीकट्टू से प्रतिबंध हटाने की मांग पूरे तमिलनाडु में फैल गई है। चेन्नई के मरीना बीच पर बुधवार से ही प्रदर्शन हो रहे हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से भी विरोध-प्रदर्शन की खबरें हैं। सड़कों पर रोष बढ़ने के मद्देनजर मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम ने फौरन एक अध्यादेश लाने की मांग करते हुए गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। हालात की जानकारी देते हुए केंद्र सरकार से इस पर जरूरी कदम उठाने की मांग की। हालांकि उन्हें इस मामले में प्रधानमंत्री से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल पाया है। पीएम ने कहा कि मामला अभी कोर्ट में चल रहा है।

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मरीना बीच पर हो रहे प्रदर्शन के मामले में दाखिल याचि‍का पर सुनवाई से इंकार कर दिया है। जबकि अन्नाद्रमुक महासचिव वीके शशिकला ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि इस पर प्रतिबंध हटाने के लिये विधानसभा के अगले सत्र में एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री के साथ अन्नाद्रमुक के 49 सांसद भी होंगे। प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मिलेगा।

पीएम ने खुद ट्विटर के माध्यम से पनीरसेल्वम से हुई मुलाकात के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध को लेकर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने जहां जल्लीकट्टू के सांस्कृतिक महत्व को सराहा, वहीं मामले को न्यायालय में विचाराधीन बताया।” हालांकि पीएम से मुलाकात के बाद बाहर आने पर मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम ने कहा कि इस मामले में जल्द ही कोई अच्छी खबर मिल सकती है।

एक अन्य ट्वीट में कहा गया कि, “केंद्र सरकार इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का समर्थन करेगी। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।” ट्वीट के जरिये यह भी बताया गया है कि एक केंद्रीय टीम जल्द ही तमिलनाडु रवाना होगी।

गौरतलब हो सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2014 में तमिलनाडु में जल्लीकट्टू के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद से ही लोग केंद्र सरकार से जल्लीकट्टू के आयोजन की अनुमति के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

राज्य में जल्लीकट्टू के समर्थन में प्रदर्शन की शुरुआत सोमवार को हुई थी, जिसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद विरोध-प्रदर्शन और भड़क गया। मरीना बीच पर हजारों की तादाद में युवक-युवतियां गुरुवार को भी प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। लोग जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध को तमिलनाडु की संस्कृति का अपमान बता रहे हैं।

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