लखनऊ। अंदरखाने से खबर आ रही है कि मुलायम के खासमखास अखिलेश के समर्थन में हाजिरी लगा रहे हैं। अखिलेश के समर्थन में पहुंचने वालों में मुलायम के कृपापात्र गायत्री प्रजापति और मुख्तार के भाई भी शामिल हैं। अखिलेश सपा पर पूरी तरह से कब्जा करने के लिए अब किसी भी हद जाने को आतुर हैं। राज्यसभा और लोकसभा में कुल 24 सांसदों में से 19 सांसदों ने पाला बदलकर अखिलेश का दामन थाम लिया है। मुख्योमंत्री आवास पर विधायकों का जमावाड़ा लगा ह़आ है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने के बाद सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के दोनों गुटों में ‘साइकिल’ पर कब्जे को लेकर जारी शक्ति प्रदर्शन की होड़ अंतिम दौर में पहुंच गई है। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और उनके मुख्यमंत्री पुत्र अखिलेश यादव चुनाव आयोग के सामने अपना दावा मजबूत करने के लिये समर्थकों द्वारा हस्ताक्षरित हलफनामे एकत्र करने में जुट गए हैं। मुलायम अपने अनुज शिवपाल सिंह यादव के साथ चुनाव आयोग में अपना पक्ष रखने के लिये गुरुवार को एक बार फिर दिल्ली रवाना हुए। मुलायम और शिवपाल के दिल्ली रवाना होने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने सरकारी आवास पर अपने समर्थक विधायकों तथा अन्य नेताओं से मुलाकात की और उनसे पार्टी के चुनाव चिह्न साइकिल पर दावा ठोंकने के लिये जरूरी शपथपत्रों पर हस्ताक्षर कराए। अखिलेश गुट का दावा है कि बैठक में 200 से ज्यादा विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने अखिलेश के पक्ष में हलफनामों पर हस्ताक्षर किए हैं।
भगोड़े रविदास मेहरोत्रा मुख्यपमंत्री आवास के बाहर डटे पर पुलिस को नहीं दिखते
मुलायम की कृपा से पनपे और फिर विधायक बने भगोड़े रविदास मेहरोत्रा इन दिनो अखिलेश के गुण्गारन करते थक नहीं रहे हैं। इनके खिलाफ गैरजमानती वारंट है लेकिन पुलिस इन्हेर हाथ्‍ तक नहीं लगा रही। बैठक में शामिल कैबिनेट मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने बाद में संवाददाताओं को बताया, ‘मुख्यमंत्री ने हमसे कहा कि मुलायम सिंह यादव जी मेरे पिता हैं। हमने उनसे कहा है कि तीन महीने के लिये हमें पूरे अधिकार मिल जाएं और हमारे फिर से सत्ता में आने के बाद आप :मुलायम: जो निर्णय चाहें, वह कर लीजिये।’ सरकार के एक अन्य मंत्री शंखलाल मांझी ने कहा कि नेताजी के बिना सपा अधूरी है। मुख्यमंत्री सपा का चेहरा हैं। चेहरे के बगैर सपा सरकार के बारे में सोचना बेकार है।चुनाव आयोग ने सपा के दोनों गुटों द्वारा ‘साइकिल’ पर दावे के सिलसिले में दाखिल किये गये दस्तावेजों पर अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग ने दोनों गुटों से आगामी नौ जनवरी तक अपने-अपने समर्थक विधायकों, विधान परिषद सदस्यों तथा सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित शपथपत्र जमा करने को कहा है, ताकि यह पता लग सके कि किसके पास कितना संख्या बल है। मुलायम गुट के सूत्रों के मुताबिक सपा मुखिया और शिवपाल आज अपने साथ विधायकों, विधान परिषद सदस्यों तथा सांसदों के हस्ताक्षरित शपथपत्र ले गए हैं।
सपा पर पूरी तरह कब्जे को तैयार है अखिलेश
पिछले रविवार को हुए सपा के विवादित राष्ट्रीय अधिवेशन में सपा के 229 में से 200 से ज्यादा विधायक, बड़ी संख्या में विधान परिषद सदस्य तथा अन्य पार्टी नेता एवं पदाधिकारी शामिल थे। इस अधिवेशन में मुख्यमंत्री अखिलेश को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि अमर सिंह को पार्टी से निष्कासित करने तथा शिवपाल सिंह यादव को सपा के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का फैसला किया गया था। अखिलेश के हिमायती माने जाने वाले सपा राज्यसभा सदस्य नरेश अग्रवाल ने दावा किया कि ज्यादातर विधायक, विधान परिषद सदस्य तथा सांसद अखिलेश के साथ हैं।सूत्रों के मुताबिक दोनों ही गुट अपनी-अपनी मांगों को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करना चाहते हैं। विधानसभा चुनाव की घोषणा हो जाने के बावजूद कोई भी गुट नरमी नहीं दिखा रहा है। दरअसल, अपने पिता की राह से जुदा रास्ते पर चल पड़े अखिलेश सपा संगठन पर अपना वर्चस्व लगातार बढ़ाते दिख रहे हैं। उनके निर्देश पर कल आजमगढ़, देवरिया, कुशीनगर और मिर्जापुर के बर्खास्त सपा जिलाध्यक्षों को कल ‘बहाल’ कर दिया गया। गत रविवार को हुए अधिवेशन में प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाये गये शिवपाल यादव ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव द्वारा ‘असंवैधनिक’ करार दिये गये उस कार्यक्रम में शिरकत करने के आरोप में इन जिलाध्यक्षों को बर्खास्त कर दिया था।

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