मिर्गी का रोग

Epilepsyमिर्गी कोई मानसिक रोग नहीं अपितु मस्तिष्कीय विकृति है। मस्तिष्क में किसी गड़बड़ी के कारण बार-बार दौरे पडऩे की समस्या हो जाती है। दौरे के समय व्यक्ति का दिमागी संतुलन पूरी तरह से गड़बड़ा जाता है और उसका शरीर लडख़ड़ाने लगता है। इसका प्रभाव शरीर के किसी एक हिस्से पर देखने को मिल सकता है, जैसे चेहरे, हाथ या पैर पर। इन दौरों में तरह-तरह के लक्षण होते हैं, जैसे कि बेहोशी आना, गिर पडऩा, हाथ-पांव में झटके आना। दौरे के समय जब रोगी के मुंह से झाग निकलते हैं और शरीर में अकडऩ आने लगती है|

हमारा मस्तिष्क खरबों तंत्रिका कोशिकाओं से निर्मित है। इन कोशिकाओं की क्रियाशीलता ही हमारे कार्यों को नियंत्रित करती है। मस्तिष्क के समस्त कोषों में एक विद्युतीय प्रवाह होता है। ये सारे कोष विद्युतीय नाडिय़ों केजरिए आपस में संपर्क कायम रखते हैं, लेकिन जब कभी मस्तिष्क में असामान्य रूप से विद्युत का संचार होने लगता है तो व्यक्ति को एक विशेष प्रकार के झटके लगते हैं और वह बेहोश हो जाता है। बेहोशी की अवधि चंद सेकंड से लेकर पांच मिनट तक की हो सकती है। इसी को मिर्गी का दौरा कहते हैं। मिर्गी का दौरा समाप्त होते ही व्यक्ति सामान्य हो जाता है। मिर्गी किसी एक बीमारी का नाम नहीं है। अनेक बीमारियों में मिर्गी जैसे दौरे आ सकते हैं। मिर्गी के सभी मरीज एक जैसे भी नहीं होते। किसी की बीमारी मध्यम होती है, किसी की तेज। यह एक आम बीमारी है जो लगभग सौ लोगों में से एक को होती है।

दुनियाभर के पांचच करोड़ लोग और भारत के करीब एक करोड़ लोग मिर्गी पीडि़त हैं। विश्व की कुल जनसंख्या के 8 से 10 प्रतिशत तक को अपने जीवनकाल में एक बार इसका दौरा पड़ सकता है।

छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. आरके गर्ग ने बताया कि हरी सब्जियों फलों को ठीक से साफ न करने से भी मिर्गी हो सकती है। सूआरों की आंतों में पाए जाने वाले टेपवर्म नामक कीड़े साग-सब्जियों के द्वारा घरों में पहुंच जाते हैं। टेपवर्म का सिस्ट यदि मस्तिष्क में पहुंच जाए तो उसके क्रियाकलापों को प्रभावित कर सकता है, जिससे मिर्गी की आशंका बढ़ जाती है। बड़ी संख्या में लोगों मिर्गी का कारण यही होता है। मस्तिष्क में कोई चोट लगने से भी मिर्गी की समस्या हो सकती है।

सम्भव है इलाज

डॉ. आरके गर्ग की माने तो ज्यादातर मामलों में मिर्गी का इलाज सम्भव है। बशर्ते इसका पूरा इलाज लिया जाए। मिर्गी की समस्या होने तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाएं। यह इलाज तीन से पांच साल तक चल सकता है इसलिए धैर्य रखने की भी जरूरत है। मिर्गी के रोगी को घर से बाहर अकेले निकलने पर अपना परिचय कार्ड अपने साथ अवश्य रखना चाहिए, जिसमें उसका नाम, पता, बीमारी का नाम और दवा का विवरण आदि का उल्लेख होना चाहिए।

ये न करें-

  • मिर्गी के रोगी को कार, स्कूटर आदि वाहन नहीं चलाना चाहिए। खतरनाक मशीनों के संचालन से भी उसे बचना चाहिए। इन मरीजों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता।
  • रोगी को जूता या प्याज न सुघाएं, इससे उसे कोई लाभ नहीं मिलता। यह सब अंधविश्वास हैं।
  • मरीज को चाबियों का गुच्छा या लोहे की कोई चीज देने का भी फायदा नहीं होता।
  • मिर्गी के झटकों के दौरान व्यक्ति को जोरों से पकड़ कर रखना भी ठीक नहीं होता। इसी तरह बेहोशी की अवस्था में में मुंह में पानी या अन्य कोई तरल पदार्थ डालना भी खतरनाक हो सकता है।

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