नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद अब बेनामी सम्पत्तियों पर हमला करने की पूरी तैयारी सरकार ने कर ली है। जो काला धन नोटों की शक्ल में था उसे तो नोटबंदी के बहाने सरकार ने बाहर निकलवाना शुरू कर दिया है लेकिन जो काला धन काली संपत्ति बन चुका है उस पर कार्रवाई शुरू हो गई है। यादव सिंह जैसे कई नाम सामने आने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के भाई आनन्द कुमार को आयकर विभाग ने नोटिस भेजा है।
बेनामी संपत्ति कानून में बदलाव कर उसे और सख्त बनाया
आप आये दिन अखबारों में लुभावने विज्ञापन देखते होंगे जिसमें बिल्डर आपको एक मकान में जन्नत की सैर करोन के दावे करता नजर आएगा। बिल्डरों द्वारा जनता को ठगने और काली कमाई को ऐसे धंधों में खपाने वाले की अब खैर नहीं। किसी भी हाल में नहीं छोड़े जाएंगे। प्रधानमंत्री ने इसी बात को लक्ष्य करते हुए नोटबंदी से पहले ही बेनामी संपत्ति कानून में बदलाव कर उसे और ज्यादा सख्त बना दिया। सरकार का यह कदम एक नवम्बर से अमल में लाया जा रहा है। 1988 में राजीव गांधी के पीएम रहते हुए भी बेनामी प्रॉपर्टी का कानून बना था जो मोदी के जमाने में बने कानून से कमजोर तो था ही उसे भी कभी लागू नहीं किया गया। 28 साल बाद पीएम मोदी ने कानून की वही फाइल निकाली और उसे सख्त बनाते हुए सुधार किए और एक नवंबर से लागू भी कर दिया अब बेनामी संपत्ति वाले बच के कहीं जा नहीं सकते।
बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन प्रोहिवेशन अमेंडमेंट एक्ट 2016
इस कानून से नपेंगे वो लोग जिन्होंने काले धन से प्रॉपर्टी बनाई जिसका हिसाब सरकार को नहीं दिया। वो बताने की हालत में नहीं हैं कि प्रॉपर्टी खरीदने के लिए पैसे कहां से आए सरकार को धोखा देने और इनकम टैक्स से बचने के लिए प्रॉपर्टी खरीदी किसी ऐसे के नाम पर जो सगा नहीं था लेकिन प्रॉपर्टी रखी अपने कब्जे में। कुल मिलाकर ऐसे पैसे से खरीदी गई प्रॉपर्टी जो सरकार की नजर में काला धन है। बेनामी संपत्ति कानून के तीर से पीएम मोदी कई शिकार करने वाले हैं। पहला शिकार होंगे वो बिल्डर जो चोरी के पैसे से चोरी चुपके चोरों को प्रॉपर्टी बेचते हैं। बेनामी संपत्ति कानून के तीर के दूसरे शिकार होंगे काले धन वाले सांप जिन्होंने काला धन कहीं तहखाने में छुपाया तो कहीं बाथरूम में। काला धन छुपाने के लिए जगह नहीं बची तो उसे खपाया प्रॉपर्टी खरीदने में।
सात साल की जेल और संपत्ति होगी जब्त
2016 के कानून में सजा के प्रावधान को ज्यादा सख्त बना दिया है। एक नंवबर से लागू नए कानून में सजा की अधिकतम सीमा 7 साल होने के साथ संपत्ति जब्त करने के प्रावधान को भी जोड़ दिया गया है। बेनामी लेनदेन का दोषी पाए जाने पर कम से कम एक साल और अधिकतम 7 साल की सज़ा और प्रॉपर्टी के मार्केट वैल्यू का 25 फीसदी तक जुर्माना होगा। जानबूझकर ग़लत जानकारी देने पर कम से कम 6 महीने और अधिकतम 5 साल की सजा और संपत्ति के बाज़ार मूल्य का 10 फीसदी तक का जुर्माना होगा। कई मामलों में जुर्माना और सजा दोनों साथ-साथ दी जा सकती है।
सरकार मांग सकती है सम्पत्ति के कागजात
एक्ट के अनुसार यदि अधिकारी को लगता है कि आपकी प्रॉपर्टी बेनामी है तो वह आपको नोटिस जारी कर प्रॉपर्टी के कागजात तलब कर सकता है। नोटिस के मिलने के बाद 90 दिन के भीतर अपनी प्रॉपर्टी के कागजात अधिकारी को दिखाने होंगे। जिसके अधिकारी तय करेगा कि आपकी संपत्ति बेनामी या नहीं।

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