चीन को लेकर रतन टाटा की आशंका निराधार नहीं है।  चीन भारत पर दबाव बनाने के लिए पाकिस्तान को मजबूत कर रहा है। पाकिस्तान को लगातार हथियारों की आपूर्ति कर चीन उसे भारत के खिलाफ उकसाने का काम कर रहा है। देश का प्रसिद्ध उद्योग घराना टाटा समूह के मुखिया रतन टाटा का यह बयान भारत की चीन के प्रति चिंता का ही आइना है। अब यह बात मानने में कोई दिक्कत नहीं कि चीन हमारा छिपा हुआ शत्रु है। और वह हमें भी युद्ध के लिए उकसा रहा है। खुफिया एजेंसी रॉ ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक चीन का नया दांव भारत को उकसाने का है ताकि विवाद बढ़े।  पाकिस्तान की तरह अब चीन भी अपनी राजनीतिक अस्थिरता से जनता का ध्यान हटाने के लिए भारत विरोध का सहारा ले रहा है।  भारत के खिलाफ चीन की इस नई चाल के पीछे चीनी सरकार का अपना सियासी फायदा है और वो भारत को हर हाल में इस चक्रव्यूह में फंसाने की कोशिश कर रहा है। भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ द्वारा सरकार को भेजी एक गोपनीय रिपोर्ट के मुताबिक चीन भारत को टकराव के लिए उकसाने की कोशिश में है। दरअसल 2012 में चीनी नेतृत्व में बदलाव के आसार हैं और लोग सरकार के काम से असंतुष्ट हैं। चीन खतरनाक इरादे भांपकर भारत ने पूर्वोत्तर राज्यों में अपनी सीमा पर रक्षात्मक गतिविधियां बढ़ा दी हैं। प. बंगाल के सीमावर्ती इलाको में परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलों को तैनात करने की योजना है। इतना ही नहीं सीमा पर भारत अपनी अग्नि-2 व पृथ्वी-3 मिसाइलों का भी सहारा लेगा। 2012 के अंत तक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के परीक्षण व तैनाती की योजना है।  असम के तेजपुर और छाबुआ में एसयू-30 एमकेआई फाइटर प्लेन के दो स्क्वाड्रन भी तैनाती किए जाएंगे। अमरीकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन भारतीय सीमा पर सैनिक गतिविधियां बढ़ा रहा है। वह अपने एयरबेस भारतीय सीमा पर ले जाने की भी तैयारी कर रहा है। हाल में चीन सिक्किम व अरूणाचल में भारत की ओर से कराए जाने रहे निर्माण पर एतराज जताता रहा है, जबकि सीमा पर तिब्बत की तरफ बड़ी तीव्र गति से उसने सडक़ और रेलवे का जाल बिछाया है। उसकी मंशा तो रेल मार्ग को नेपाल तक ले जाने की है, जो भारत के लिए निश्चित ही चिंता का विषय है। 1962 की लड़ाई में भले ही भारत को चीन के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा हो लेकिन उसके बाद हालात बदल गए हैं। उसके बाद भारत और चीन में काफी बदलाव आ चुका है। वर्तमान हालात को देखते हुए चीन भारत से सीधे युद्ध करने से बचना चाहेगा। फिर भी चीन की विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं को भुलाना कोई अक्लमंदी नहीं होगी। रॉ की रिपोर्ट पर भारत को चीन से अतिरिक्त सतर्कता बरतनी ही होगी।

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